जेल में अपराधी गिरोह ही नहीं बना रहे बल्कि बाहर आकर वारदात को अंजाम भी दे रहे हैं। असल में जेल में रहने के दौरान अपराधियों में मेल- मुलाकात होती है, जो लंबे समय तक साथ रहने से दोस्ती में बदल जाती है। दोस्ती होने पर जेल में ही अपराध की पटकथा लिखी जाती है। फिर जेल से छूटते ही वारदात को अंजाम दिया जा रहा है, जो पुलिस के लिए कड़ी चुनौती है। पिछले कुछ माह में पुलिस के शिकंजे में आए अपराधियों ने यह बात कबूली है। इससे पुलिस अफसरों की चिंता बढ़ गई है। जेल में पनप रहे गिरोह ने पिछले तीन माह में बारह से ज्यादा वारदात को अंजाम दिया। इनमें चोरी, लूट, डकैती और अपहरण जैसे अपराध शामिल हैं।