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कोरोना की कैद ने बच्चों में बढ़ाया चिड़चिड़ापन

घरों में रहे बंद, नतीजे आने लगे सामनेमोबाइल की लत बना खतराशारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध

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कोरोना की कैद ने बच्चों में बढ़ाया चिड़चिड़ापन

कोरोना की कैद ने बच्चों में बढ़ाया चिड़चिड़ापन

भीलवाड़ा।
कोरोना के चलते डेढ़ साल से स्कूलें बंद है। बच्चे घरों में 'कैद होकर रह गए। इसका बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर विपरीत असर पड़ा है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण बढऩे के कारण २१ मार्च, २०२० से सरकारी और निजी स्कूलें बंद हंै। ऑनलाइन क्लास शुरू होने के बाद कई छात्रों को मोबाइल की लत लग गई। पहले महज 5 प्रतिशत बच्चे मोबाइल यूज करते थे लेकिन कोरोना में बंदिशों के चलते 30 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे मोबाइल पर अधिक समय बिताने लगे हैं। बच्चों की परीक्षाएं भी ऑनलाइन हो रही है। घरों से बाहर निकलना बंद है। उनके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
हालांकि भीलवाड़ा जिला कोरोना से २ अगस्त को ही मुक्त हो चुका है। कोरोना के केस कम होने पर राज्य सरकार ने पहले २ अगस्त से स्कूल खोलने की घोषणा की थी, लेकिन विरोध होने के कारण अब स्कूल १६ अगस्त या १ सितम्बर से स्कूले खोलने की योजना है।

गुस्सैल हो रहे बच्चे
जानकारों के अनुसार, लॉकडाउन में स्कूलों में ऑनलाइन क्लास शुरू हुई तो दुष्परिणाम सामने आने लगे। बच्चे मोबाइल एडिक्शन की चपेट में आ रहे हैं। एमजीएच में मनोचिकित्सक के पास बच्चों में मोबाइल और इंटरनेट की लत के कई मामले आ रहे हैं। बच्चों के व्यवहार में बदलाव आने लगा है। पेरेंट्स की शिकायत है कि बच्चों को समझाते हैं तो वे चिड़चिड़े और गुस्सैल हो रहे हैं। इस तरह के औसत हर दूसरे दिन एक बच्चा आ रहा है।
मानसिक विकास रूका
छोटी उम्र में गुस्सा या चिढऩा आम बात है, क्योंकि इस उम्र में चीजों को समझना आसान नहीं होता। मोबाइल की लत के कारण ये और बढ़ रहा है। अगर बच्चे को फोन का इस्तेमाल करने से रोका जाए तो गुस्से की प्रवृति बढ़ रही है। ये बच्चों को पहले से ज्यादा चिड़चिड़ा बना रही है। मोबाइल ही उनकी दुनिया हो गई है। लॉकडाउन चुनौती है। ऐसे में पेरेंट्स को चाहिए कि वे सब्र से काम लें और बच्चों के मानसिक विकास को ध्यान में रखें। भविष्य में इन्ट्रक्शन की बड़ी समस्या आने वाली है। वह सब कुछ मोबाइल से सीख रहे हैं। मोबाइल पर क्या आता है, यह किसी से छिपा नहीं है।
डॉ. वीरभान चंचलानी, मनोरोग विशेषज्ञ, एमजीएच भीलवाड़ा