
Crisis on 20 lakh teachers of the state
राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) भीलवाड़ा जिला इकाई ने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया एक निर्णय पर हस्तक्षेप और पुनर्विचार की मांग को लेकर सांसद दामोदर अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने राज्य एवं देश के लगभग 20 लाख शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा और आजीविका पर आए गंभीर संकट की ओर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने का अनुरोध किया है।
जिलाध्यक्ष सुरेश चन्द्र बडवा ने सांसद अग्रवाल को बताया कि 1 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय की ओर से दिए गए निर्णय में कक्षा 1 से 8 तक कार्यरत सभी शिक्षकों के लिए, उनकी नियुक्ति तिथि जो भी रही हो, शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी/आरईईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस निर्णय से प्रदेश सहित देशभर के लाखों शिक्षकों की पदोन्नति और सेवा-सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
जिलाध्यक्ष बडवा ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और एनसीटीई की अधिसूचना 23 अगस्त 2010 के तहत वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को विधिक रूप से योग्य एवं छूट प्राप्त श्रेणी में रखा गया था। जबकि 2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए ही निर्धारित अवधि में टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक था। न्यायिक निर्णय में इन दोनों श्रेणियों के मध्य स्पष्ट विधिक अंतर की उपेक्षा की गई है।
इस न्यायिक निर्णय ने राज्य की ओर से टेट अनिवार्यता की प्रथम अधिसूचना जारी होने से पूर्व विधिपूर्वक नियुक्त शिक्षकों का योग्य एवं छूट प्राप्त दर्जा भी संकट में डाल दिया है।
राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) की ओर से प्रदेश उपाध्यक्ष सुषमा विश्नोई, प्रदेश सेवानिवृत्त प्रकोष्ठ सह संयोजक सुशीला जाट, जिला मंत्री ईश्वर सिंह चौधरी, शहर अध्यक्ष बसंत पोरवाल और सुवाणा ब्लाक अध्यक्ष विनोद झंवर सहित अन्य पदाधिकारियों ने सांसद को अपनी बात रखी। उन्होंने सांसद अग्रवाल से केंद्र सरकार के समक्ष इस मामले को सही ढंग से उठाने की मांग की ताकि एनसीटीई की अधिसूचना के अनुरूप राज्य में टेट अनिवार्यता की अधिसूचना लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों का योग्य एवं छूट प्राप्त दर्जा विधिक रूप से सुरक्षित रह सके। केंद्र सरकार आवश्यक विधिक और नीतिगत उपाय अपनाए ताकि सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका प्रस्तुत की जा सके। आवश्यकता पड़ने पर संसद में संशोधन विधेयक लाकर शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के संबंधित प्रावधानों में सुधार किया जाए। संगठन ने बताया कि इस स्थिति के कारण प्रभावित शिक्षक तनाव और असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। इसका सीधा असर विद्यालयी शिक्षा की स्थिरता और शिक्षकों के मनोबल पर पड़ रहा है।
Updated on:
29 Nov 2025 09:24 pm
Published on:
29 Nov 2025 09:24 pm
