सिगरेट के फिल्टर से बनने लगे तकिये- कुशन

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल: नोएडा की कंपनी २०० रुपए प्रतिकिलो खरीद रही फिल्टर, भीलवाड़ा में १०० जगह रखवाए डिब्बे

By: Suresh Jain

Published: 26 Jan 2021, 02:43 PM IST

सुरेश जैन

भीलवाड़ा.
सिगरेट से पर्यावरण को नुकसान घटाने के साथ कमाई का जरिया भी तलाशा गया है। युवाओं का दल सिगरेट बट (फिल्टर) से अन्य काम की चीजें बनवाने में मदद कर रहा है। इसके लिए फिल्टर एकत्र किए जा रहे हैं। मालूम हो, सिगरेट पीने के बाद उसके पीछे लगे फि ल्टर को बट कहते है। फिल्टर को मिट्टी में धुलने में कई साल लग जाते हैं, जो पर्यावरण के लिहाज से घातक है।
नोएडा की एक कंपनी ने प्रदेश के कुछ युवाओं की मदद से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल की। उन्होंने पूरे प्रदेश में सिगरेट के फि ल्टर एकत्र करने का अभियान छेड़ा। कंपनी युवाओं के जरिये सिगरेट के फि ल्टर खरीदती है। कंपनी इसके लिए प्रतिकिलो २०० रुपए चुकाती है। भीलवाड़ा शहर में १०० जगह छोटे डिब्बे रखवाए गए हैं, जहां सिगरेट के फिल्टर डाले जा सकते हैं।
अजमेर के योगेश मीणा ने बताया कि दिल्ली के व्यक्ति ने सम्पर्क किया तथा फि ल्टर एकत्र करने को कहा। पहले अजीब लगा लेकिन अब कई जिलों से फि ल्टर एकत्र किए जा रहे हैं। एक किलो फि ल्टर पर १०० रुपए उसे मिलते हैं जबकि सौ रुपए एकत्र करने वाले को दिए जाते हैं। भीलवाड़ा शहर में १०० से अधिक पान की केबिन व होटलों में फिल्टर एकत्र करने के डिब्बे रखवाए हैं। पान विक्रेता राजकुमार पहलवानी ने बताया कि एकत्र बट को नोएडा में तीन चरणों में प्रोसेस किया जाता है। इसमें पहले चरण में राख, दूसरे में तंबाकू और तीसरा फि ल्टर है। सिगरेट से निकली राख से बनाई जाती है। साथ ही इससे पेपर और तंबाकू प्रोसेस करने के बाद खाद बनाई जाती है।
एेसे करते इस्तेमाल
सिगरेट बट से खाद, चाबी के छल्ले, तकिए, सोफे के कुशंस आदि बनाए जा रहे है। नोएडा की एक कंपनी यह सब बना रही है। यह कंपनी रॉ मटेरियल के लिए हर जगह से सिगरेट के बट एकत्र करा रही है। उन्होंने पान की दुकानों पर बॉक्स लगवाए हैं। पान वालों को पैसा देकर सिगरेट बट खरीदे जा रहे हैं। फिर सिगरेट बट का पुनर्चक्रण किया जाता है। फि ल्टर को पहले रसायन से साफ किया जाता है। फिर बदबू रहित करने के लिए मशीन से धुलाई करते हैं। फि ल्टर को सुखाने के बाद रूई की तरह तकिए, कुशन आदि बनाने में इस्तेमाल करते हैं। फि ल्टर से अलग की गई तम्बाकू से जैविक खाद बनाए जा रही है। इसकी मांग अब बढऩे लगी है।

Suresh Jain Reporting
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