
डाम का दंश: आठ माह की बच्ची को गर्म तार से दागा
जिले के बीगोद क्षेत्र की रहने वाली आठ माह की मासूम बालिका एक बार फिर अंधविश्वास का शिकार हुई। सर्दी-जुखाम की शिकायत पर उसे गर्म तार से दाग दिया गया। दागने वाला बच्ची का बड़ा दादा ही है। हालत बिगड़ने पर उसे मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। वहां बच्ची का हालत िस्थर बनी हुई है। बाल कल्याण समिति ने अस्पताल पहुंच कर घटनाक्रम की जानकारी ली। समिति ने प्रसंज्ञान लेते हुए परिजनों को बयान लिए। इस सम्बंध में कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
जानकारी के अनुसार बीगोद क्षेत्र के कीरो की झोपड़ी निवासी आठ माह की सुमन को एक माह पूर्व सर्दी-जुखाम की शिकायत पर परिजन बीगोद अस्पताल ले गए थे। वहां उसका इलाज करवाया गया। कुछ दिनों बाद फिर तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे अस्पताल ले जाने की बजाए पडोस में रहने वाले सत्तर वर्षीय बड़े दादा के पास ले गए। वहां रिश्तेदार ने निमोनिया ठीक करने का अंधविश्वास में परिजनों को उलझा दिया। रिश्तेदार ने गर्म तार से बच्ची के पेट पर डाम लगा दिया। इससे उसके पेट पर निशान हो गए। तीन-चार दिन पूर्व सुमन की हालत बिगड़ गई। घर पर इलाज किया। हालत ज्यादा बिगड़ने पर उसे जिला मुख्यालय िस्थत एमसीएच लाया गया। यहां बच्ची को सांस लेने में दिक्कत पर गहन शिशु चिकित्सा इकाई में भर्ती कर लिया गया। सूचना पर बाल कल्याण समिति अध्यक्ष डॉ. राजेश छापरवाल और सदस्य फारूख पठान अस्पताल पहुंचे। यहां परिजनों से बातचीत की।
बीमारी का इलाज डाम नहीं, अस्पताल ले जाना ठीक होगा
आठ माह की बालिका को डाम उसके रिश्तेदार ने लगाया। बुजुर्ग को दिखाने के बाद उसने परिजनों को अस्पताल ले जाने की समझाने की बजाए अंधविश्वास में फंसा दिया। डाम लगाने पर बच्ची दर्द से तड़पती रही। लेकिन ना परिजनों ने उसका दर्द सुना ना ही बुजुर्ग ने। निमोनिया का इलाज अस्पताल ही है। तत्काल चिकित्सक को दिखाना ही सहीं होगा।
यह अपराध है, जान तक जा चुकी मासूमों की
जिले में पिछले कुछ सालों में डाम लगाने के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। डाम लगाना अपराध है। डाम के कारण जिले में कई बच्चों की जान तक जा चुकी है। पुलिस ने परिजनों, भोपों और रिश्तेदारों के खिलाफ मामला दर्ज किया। कई जनों को जेल तक भेजा।
Published on:
27 Oct 2022 12:56 pm
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