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और यहां गाजे—बाजे से निकलती है रावण की सवारी, श्मशान में होता है दहन, पूरा कस्बा होता है शामिल

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Dashara in bhilwara

Dashara in bhilwara

बनेड़ा ।
दशहरे पर जहां सब जगह रावण बनता हैं वहीं उसे जलाया जाता है। लेकिन भीलवाड़ा जिले के बनेड़ा कस्बे में रावण के पुतले की सवारी की ढोल ढमाकों के साथ शोभायात्रा निकाली जाती है। युवा अखाड़ा प्रदर्शन करते है। पूरे कस्बे में घूमकर शोभायात्रा श्मशान घाट पहुंचती है जहां रावण के पुतले का दहन किया जाता है।

हर साल की तरह इस बाद भी दशहरे पर अखाड़ा प्रदर्शन व ढोल-नगाड़ों के साथ युवा शक्ति द्वारा दिन में नाचते-गाते श्मशान घाट तक रावण के पुतले का जुलूस निकाला जाएगा। सारे ग्रामवासी दिन में खारिया कुंड से रावण के साथ रवाना होकर मुख्य बाजार बस स्टैंड से होते हुए शाम तक श्मशान घाट तक पहुंचेंगे। यहां रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। इस मौके पर भव्य आतिशबाजी भी की जाएगी।


50 सालों से परंपरा
दशहरा कमेटी के अरविंद अजमेरा और किशन सिंह ने बताया है कि यह परंपरा लगभग 50 सालों से चली आ रही है और पूरे देश में सिर्फ बनेड़ा में ही इस तरह की सवारी निकाली जाती हैं । रावण बनेड़ा के स्थानीय कारीगरों द्वारा ही बनाया जाता हैं । सभी ग्रामवासिों का इसमें सहयोग रहता हैं। बनेड़ा के जो लोग नौकरी, व्यवसाय, शिक्षा या किसी भी वजह से बाहर रहते हैं वे भी दशहरे के दिन यहां अवश्य आते हैं इस प्रकार दशहरा बनेड़ा का प्रमुख व विशेष त्योहार है।


तैयारियों में जुटे कलाकार
दशहरे के इस मौके पर सुबह शस्त्र पूजन का भी आयोजन भी किया जाता है। रावण के पुतले के निर्माण और अखाड़ा प्रदर्शन के लिए स्थानीय कलाकार अभी से दिन रात इसकी तैयारियों में जुटे हुए हैं।