
सेल्फी लेकर रावण ने 20 सैकंड में ही त्याग दिए प्राण
भीलवाड़ा।
जिलेभर सहित शहर में विभिन्न स्थानों पर दशहरा पर्व पर शनिवार शाम को रावण सहित मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले जल उठे। नगर परिषद की ओर से शहर में तालाब की पाल सहित लेबर कॉलोनी, उपनगर पुर व सांगानेर में भी पुतला दहन का किया गया। इनके अलावा शहर की विभिन्न कॉलोनियों में भी कई संगठनों ने रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया। तालाब की पाल पर शनिवार शाम को आतिशबाजी के साथ 20 सैकंड में ही रावण का पुतला खाक हो गया। पुतलों की रंग-बिरंगी आतिशबाजी से पूरा आसमान जगमाने के साथ ही पटाखों की आवाज से शहर गूंजायमान हो उठा। शहर सहित आसपास के क्षेत्र सैंकड़ों लोग रावण दहन को देखने पहुंचे। प्रशासन द्वारा तेजाजी चौक में सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। दो ड्रोन कैमरे से दशहरा मैदान पर नजर रखी जा रही थी।
श्री रामलीला कमेटी के विभिन्न रूप धरे कलाकार आजाद चौक से ट्रैक्टर-ट्रोलियों में शोभायात्रा निकालते हुए तालाब की पाल पर पहुंचे। जहां नगरपरिषद सभापति ललिता समदानी ने किरदारों को माला पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान सेल्फी का क्रेज भी दिखा। राम-रावण की भूमिका में आए कलाकारों ने मैदान में विभिन्न मुद्राओं में सेल्फी ली।
चारभुजानाथ ने जारी किया फरमान
तेजाजी चौक स्थित तालाब की पाल पर दशहरा मेले में रावण वध करने के लिए माहेश्वरी समाज श्रीचारभुजानाथ मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में भगवान चारभुजानाथ के बैवाण की शोभायात्रा निकाली गई। ट्रस्ट मंत्री रामस्वरूप सामरिया ने बताया कि सूर्यास्त के समय दशहरा स्थल पहुंच 'दशानन सरकार' पर अपने बाण से लंका द्वार पर वार कर उसके दहन का फरमान जारी किया गया। यहां नगर व्यास की ओर से कथा वाचन किया गया। आरती के बाद भक्तजन भगवान चारभुजानाथ को पंचमुखी दरबार ले गए। धानमण्डी होते हुए शोभायात्रा मार्ग के देवालयों में विशेष पूजा के बाद रात 10.30 बजे वापस बड़ा मंदिर पहुंचे। इसके बाद राम का किरदार निभा रहे श्री रामलीला कमेटी के कलाकार ने शाम को 6.25 बजे आग में जलता हुआ तीर चलाकर रावण के 51 फीट ऊंचे पुतले का दहन किया।
दांया हाथ और तलवार रही सुरक्षित
पुतले में आग लगते ही मात्र 20 सैकंड में ही रावण का दम घुट गया। अहंकारी रावण के पुतले की रंग-बिरंगी आतिशबाजी से आसमान जगमाने के साथ ही पटाखों की आवाज से शहर गूंज उठा। पूरा पुतला आग के हवाले हो गया लेकिन तलवार थामे रावण का बाया हाथ आग से सुरक्षित बच गया। इतने में रस्सा खींचकर रावण के पुतले को नीचे गिराया गया। तब जाकर बायां हाथ और तलवार आग में जले। पुतले के नीचे गिरते ही लोग उसके बांस के टुकड़ों को उठाने दौड़ पड़े, लेकिन मोर्चा संभल रहे पुलिसकर्मियों ने उन्हें बेरिकेड्स के भीतर तक नहीं आने दिया।
Published on:
30 Sept 2017 10:47 pm
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