
खेत में मिली नवजात ने हारी जिंदगी की जंग
शाहपुरा।
ढाई दिन की जिंदगी में मासूम ने जीवन की कड़वी सच्चाई जान ली। उसने पूरी तरह से आंख भी नहीं खोली थी कि उससे पहले ही संघर्ष की जद्दोजहद शुरू हो गई। जिंदगी-मृत्यु से जंग लड़ रही यशस्वी आखिरकार बुधवार सुबह हार गई। उसने जिंदगी को अलविदा कह दिया। शाहपुरा क्षेत्र के रायपुर गांव में तीन दिन पूर्व सर्दी में खेत में मिली तीन घण्टे की नवजात के दम तोडऩे के बाद कई सवाल खड़े हो गए। शाहपुरा थाना पुलिस ने पोस्टमार्टम करवा कर उस पर हक जता रहे परिजनों को शव सौप दिया।
जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह रायपुर में खेत में नवजात को बिलखते ग्रामीणों ने देखा। उसे शाहपुरा सैटेलाइट अस्पताल पहुंचाया। हालत नाजुक होने से जिला मुख्यालय के एमजीएच रैफर कर दिया था। प्रसव के बाद तीन घण्टे से भी अधिक समय तक खुले में पड़े रहने से मासूम का शरीर शिथिल पड़ गया था। उसे सांसे लेने में भी दिक्कत हो रही थी। एमजीएच के शिशु गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती नवजात को बचाने के लिए चिकित्सकों ने हर सम्भव प्रयास किए। उधर, बाल कल्याण समिति ने नवजात को यशस्वी नाम दिया था। नवजात ने बुधवार सुबह आखिरी सांस ली। शव को मोर्चरी में रखवाया गया था।
समिति अध्यक्ष सुमन त्रिवेदी ने नवजात के दम तोडऩे के बाद पोस्टमार्टम कराने के लिए प्रमुख चिकित्सा अधिकारी और शाहपुरा थानाप्रभारी को पत्र लिखा। पोस्टमार्टम से पहले नवजात पर हक जता रहे पिता को भी बुलाया। उसके बाद दोपहर में पोस्टमार्टम की कार्रवाई हुई। शव को बाद में परिजनों को सौप दिया। जहां रायपुर में उसको दफना दिया गया।
जांच में पुलिस
नवजात के लावारिस मिलने के बाद रायपुर से बाहर घण्टे बाद समिति के समक्ष पेश गांव का माधू गुर्जर ने बेटी को अपना बताया था। कहा कि उसकी पत्नी की मानसिक हालत ठीक थी। सुबह शौच के लिए जाते समय रास्ते में प्रसव हो गया। प्रसव के बाद बेहोश हो गई। होश आने पर घर पहुंच गई। हालांकि पुलिस को यह बात गले नहीं उतर रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
Published on:
29 Nov 2017 08:50 pm
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