
बागोर थाने की महिला हवालात में बंद मादक पदार्थ तस्करी के आरोपित के खिड़की तोड़कर भागने के बाद हुई किरकिरी से पुलिस महकमे ने सबक ली है। भागने के पीछे सबसे बड़ा कारण संतरी की लापरवाही माना गया।
भीलवाड़ा।
बागोर थाने की महिला हवालात में बंद मादक पदार्थ तस्करी के आरोपित के खिड़की तोड़कर भागने के बाद हुई किरकिरी से पुलिस महकमे ने सबक ली है। भागने के पीछे सबसे बड़ा कारण संतरी की लापरवाही माना गया। उसके पीछे कारण यह रहा कि पहरेदारी में संतरी की लम्बी ड्यूटी ली जा रही है। इसके चलते हर थाने में अब संतरी तीन घण्टे ही पहरेदारी करेगा। ताकी वह सावचेत होकर अपनी ड्यूटी निभा सके।
गौरतलब है कि अफीम डोडा चूरा तस्करी का आरोप में हवालात में बंद एक आरोपित 8 अप्रेल को सुबह बैरक की खिड़की का सरिया तोड़कर भाग निकला था। वारदात का पता चलने पर पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया था। बंदी को वहां महिला बैरक में बंद रखा गया था। इस मामले में पुलिस अधीक्षक ने बागौर थाने के प्रभारी दातार सिंह को लाइन हाजिर कर दिया, जबकि संतरी को निलंबित करने के आदेश दिए थे।
नियम तीन का कर रहे छह-छह घण्टे
हर थाने पर चौबीस घण्टे एक सिपाही पहरेदारी पर रहता है। सशस्त्र पुलिसकर्मी हवालात से लेकर थाने में आने-जाने वालों पर निगरानी रखता है। इस समय हर सिपाही से छह-छह घण्टे की पहरेदारी करवाई जा रही है। रात में छह घण्टे रहने वाले सिपाही के लिए लम्बा समय व्यतीत करना मुश्किल हो जाता है। कई बार पहरेदारी पर लगा सिपाही सो जाता है। एेसे में थाने की निगरानी नहीं हो पाती। नियम मुताबिक तीन घण्टे ही एक सिपाही से पहरेदारी करवाई जानी चाहिए। पुलिस महकमे में नफरी की कमी के कारण छह-छह घण्टे की पहरेदारी करवाई जा रही है।
बैठक में उठा मुद्दा, एसपी ने दिखाई गम्भीरता
पुलिस अधीक्षक प्रदीपमोहन शर्मा ने हाल ही में तिमाही बैठक ली। यह मुद्दा बैठक में उठा और उन्होंने आदेश दिए कि थानों पर सिपाहियों से तीन-तीन घण्टे ही पहरेदारी करवाई जाए। ताकी पहरे पर मौजूद सिपाही अधिक सावचेत होकर काम कर सके।
Published on:
15 Apr 2018 01:33 pm
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