7 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

योग्यता के आधार पर पद मिले, तभी देश और समाज का विकास संभव

अनेकांत इन एडमिनिस्ट्रेशन सेमिनार

2 min read
Google source verification
योग्यता के आधार पर पद मिले, तभी देश और समाज का विकास संभव

योग्यता के आधार पर पद मिले, तभी देश और समाज का विकास संभव

भीलवाड़ा।
यहा चातुर्मास कर रहे आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में शनिवार को तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के तत्वावधान में अनेकांत इन एडमिनिस्ट्रेशन कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ। इसमें देशभर से कई आईएएस, आईपीएस, आईआरएस व विभिन्न सिविल सर्विस अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आचार्य महाश्रमण ने कहा प्रशासनिक सेवा में व्यक्ति योग्यता और श्रम के बल पर ही पहुंच सकता है। योग्यता न होने पर भी पद की लिप्सा करना गलत है। योग्यता, ज्ञान और शक्ति नहीं है, फिर भी सम्मान और महत्व चाहिए तो व्यवस्था गड़बड़ हो जाती है। सम्मान के पीछे न दौड़े, सम्मान मिल सके ऐसी अर्हता का अर्जन करे। योग्यता के आधार पर पद दिए जाए, तभी समाज और राष्ट्र विकास की ओर बढ़ सकता है। प्रशासन के पद पर आसीन व्यक्ति दुराग्रह, आग्रह की भावना न रखे यह जरूरी है। कार्य योजना और टीम के साथ होना चाहिए। टीम के हर व्यक्ति के विचारों का सम्मान और जहां दूसरों के विचार युक्ति संगत लगे, वहां खुद के विचार का त्याग कर देना ही अनेकांत का प्रयोग है। अनेकांत के पालन से टीम में बिखराव नहीं होगा व निर्णय भी परिपूर्णता पूर्वक हो सकते है।
आचार्य ने कहा कि धर्म के दो प्रकार है. श्रत धर्म, श्रमण (चारित्र) धर्म। श्रमण धर्म के फिर शांति, मुक्ति, आर्जव और मार्दव आदि प्रकार हो जाते है। साधु के लिए इनकी पालना आवश्यक होती है। पांच महाव्रत की निर्मलता इन दस धर्मों की आराधना करने से ही रह सकती है। अनुकूल-प्रतिकूल कैसी भी परिस्थिति हों, हमें शांति से सहन करना चाहिए। मुनि तो वही होता है, जो सहन कर सके। साधना के लिए जरूरी है कि लोभ से मुक्त रहकर अनासक्ति का विकास हो। पदार्थों के प्रति भी रागात्मक आकर्षण नहीं होना चाहिए। जितना आकर्षण कम होगा निर्लिप्तता का भाव उतना ही बढ़ सकेगा। कार्यक्रम में तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन पारख, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पंकज ओस्तवाल, महामंत्री हिम्मत जैन, राजेंद्र सेठिया ने भी विचार व्यक्त किए।