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भीलवाड़ा के लिए कराई थी ट्रेनिंग , चित्तौडग़ढ़ पहुंच गया डेल्टा

जिस खोजी श्वान डेल्टा को भीलवाड़ा आवंटित कर बैंगलूरू में नौ माह की ट्रेनिंग दिलाई गई उसे चित्तौडग़ढ़ भेज दिया गया

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जिस खोजी श्वान डेल्टा को भीलवाड़ा आवंटित कर बैंगलूरू में नौ माह की ट्रेनिंग दिलाई गई। उसे चित्तौडग़ढ़ भेज दिया गया।

भीलवाड़ा।

भीलवाड़ा पुलिस का नसीब खराब या फिर भाग्य साथ नहीं दे रहा। बात चाहे कुछ भी हो। अपराधियों पर लगाम कसने के लिए दो साल से खोजी श्वान विहीन पुलिस बेड़े में डॉग स्क्वाइड नहीं जुड़ा है। जिस खोजी श्वान डेल्टा को भीलवाड़ा आवंटित कर बैंगलूरू में नौ माह की ट्रेनिंग दिलाई गई। उसे चित्तौडग़ढ़ भेज दिया गया। आलम यह हुआ कि नया डॉग स्क्वाइड से एक बार फिर महकमे को महरूम होना पड़ा।

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स्थानीय पुलिस महकमे की नौ साल से कदमताल कर रही खोजी श्वान कुटीपी की डेढ़ साल पूर्व मौत हो जाने के बाद उसकी जगह कोई नहीं ले पाया। करीब एक साल पूर्व बेड़े में नए श्वान आने की उम्मीद जगी। 'डेल्टा' नाम श्वान को भीलवाड़ा आवंटित हुआ। उसे बैंगलूरू भेजा गया और वहां नौ माह की विशेष ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग के बाद जयपुर लौट आया। गत माह उसे भीलवाड़ा भेजने की बजाए चित्तौडग़ढ़ पुलिस को सौप दिया गया। उसका कारण उदयपुर सम्भाग में खोजी श्वान नहीं था।

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कैसे मिले अपराध रोकथाम में मदद
अपराध रोकथाम और अपराधियों की गिरेबां नापने में पुलिस को मदद नहीं मिल पा रही। बड़ी वारदात होने पर पुलिस अधिकारियों को खोजी श्वान अनुसंधान में मदद करता है। घटनास्थल को सूंघकर अपराधियों के बारे में सुराग देता है। लेकिन खोजी श्वान नहीं होने से मुश्किल हो रही है। वारदात के बाद आसपास के जिलों की ओर मुंह ताकना पड़ता है। जब तक खोजी श्वान पहुंचता है तब तक काफी देर हो जाती है। घटनास्थल के साक्ष्य तक मिट जाते है। या फिर पुलिस को इंतजार करना पड़ता है।

नौ साल से कदमताल कर रही खोजी श्वान कुटीपी की डेढ़ साल पूर्व मौत

पुलिस महकमे की नौ साल से कदमताल कर रही खोजी श्वान कुटीपी की डेढ़ साल पूर्व मौत के बाद डेल्टा से भीलवाड़ा पुलिस को उम्मीद थी। लेकिन उसे नौ माह की विशेष ट्रेनिंग के बाद भीलवाड़ा की बजाय चित्तौड़गढ़ भेज दिया गया।