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लोकप्रिय हो रही ड्रैगन फ्रूट्स की खेती

—बड़ी कमाई की उम्मीद —एक बार पौधा लगाने के बाद 35 वर्ष देते फल विदेशी फल ड्रैगन फ्रूट्स कम समय में ही लोकप्रियता हासिल कर चुका है। भीलवाड़ा जिले में सवाईपुर के खजीना गांव में इसकी खेती हो रही है। यहां चार देशों की वैरायटी के पौधे तैयार किए जा रहे हैं।
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भीलवाड़ा

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VIKAS MATHUR

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Updated: 19 Jul 2023, 5:05 PM IST

लोकप्रिय हो रही ड्रैगन फ्रूट्स की खेती

लोकप्रिय हो रही ड्रैगन फ्रूट्स की खेती

नर्सरी में पौध भी कर रहे तैयार
किसान नर्सरी में इसकी पौध भी तैयार कर रहे हैं। इसमें श्रीलंका, थाईलैण्ड, स्विटजरलैंड व इजरायल देशों की किस्में शामिल हैं। इन्हें वे अन्य किसानों को सप्लाई भी कर रहे हैं।

डेढ़ बीघा मेें छ: हजार पौधे
किसान रामेश्वरलाल जाट ने बताया कि उसने डेढ़ बीघा में 6 हजार ड्रैगन फ्रूट्स के पौधे लगाए हैं। ढाई साल पहले उन्होंने भूटान व श्रीलंका से इसकी पौध मंगाई और खेती की शुरुआत की। कुल 6 लाख रुपए की लागत आई। पिछले वर्ष ही पौधों पर फूल व फल बनने लगे। इस वर्ष काफी संख्या में फूल खिले हैं।

400 रुपए प्रति किलो तक भाव
ड्रैगन फ्रूट्स के पौधे के पांच वर्ष के होने पर बीस से तीस किलो फल मिलने लग जाते हैं। इनका बाजार भाव 250 से लेकर 400 रुपए प्रति किलो तक होता है। इनकी बिक्री भीलवाड़ा के अलावा जयपुर, दिल्ली, अहमदाबाद की मंडियों में होती है। किसान रामेश्वर लाल का कहना है कि यह खेती लंबे समय तक चलती है। एक बार पौधा लगाने के बाद 35 वर्ष तक इसमें फल आते हैं। दक्षिणी अमेरिका के अलावा देश में गुजरात के कच्छ, नवसारी व सौराष्ट्र में बड़े पैमाने पर इसकी खेती होती है।

गुजरात व हरियाणा सरकार देती है अनुदान
किसान ने ड्रैगन फ्रूट्स के बीच में मिर्ची सहित अन्य सब्जियां भी लगा रखी है । इससे आमदनी होती रहती है। किसान का कहना है कि इसकी खेती पर गुजरात व हरियाणा सरकार एक बीघा में लगभग डेढ़ लाख रुपए तक अनुदान देती है। राजस्थान सरकार भी अनुदान दे तो किसानों को काफी प्रेरणा मिलेगी।

जैम-जैली व आईसक्रीम बनाने में उपयोगी
ड्रैगन फ्रूट्स गुलाबी रंग का रसभरा मीठा फल है। मुख्यत: इसकी तीन किस्में हैं- सफेद व लाल गूदे वाला गुलाबी फूल और सफेद गूदे वाला पीला फल। इससे डायबिटीज व कॉलेस्ट्रोल नियंत्रित रहते हैं। इस फल से जैम, जैली, आईसक्रीम और वाइन भी बनाई जाती है।

नंदलाल दरोगा— सवाईपुर