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ईसीएस बंद: सरकार का ‘चेक बाउंस !

वित्त वर्ष के आखिरी दिन बिलों की मारामारी, अटके करोड़ों के भुगतानसरकारी महकमे नहीं दे पाए रुपए
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ECS off: Government's check bounced in bhilwara

ECS off: Government's check bounced in bhilwara

सुरेश जैन
भीलवाड़ा।
सरकार के खजाने से जमकर खर्चा हुआ, लेकिन प्रदेश में करोड़ों का भुगतान 31 मार्च को अटक गया। भुगतान अटकने को लेकर विरोधाभाषी कारण सामने आ रहे हैं। जहां विभिन्न विभागों की ओर से बजट खत्म होने का तर्क दिया जा रहा है, वहीं कोष एवं लेखा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि बजट खत्म नहीं हुआ बल्कि ईसीएस बंद होने से भुगतान नहीं हो पाया। वित्त विभाग के अधिकारियों के पास खर्चा तय राशि से अधिक होने की जानकारी मिली है। जिन बिलों का भुगतान रुक गया, उनका नए बजट से भुगतान होगा। अकेले जयपुर कोष कार्यालय में सैकड़ों करोड़ रुपए के बिलों का भुगतान नहीं होने की जानकारी आई है। यही स्थिति दूसरे जिलों के कोष कार्यालयों में रही। वित्तीय वर्ष का आखिरी दिन होने के कारण शनिवार—रविवार को सभी दफ्तरों में कामकाज हुआ। रिजर्व बैंक के निर्देश पर बैंक भी खुले रहे। कई विभागों ने बजट शेष रहने के कारण लाइब्रेरी सहित अन्य कार्य पर राशि खर्च की।

करीब 2 हजार करोड़ का भुगतान नहीं: सूत्रों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2018—19 समाप्त होने से पहले सभी विभागों की ओर से बिल तैयार कर जिला कोष कार्यालयों को भेजे गए, लेकिन ईसीएस बंद होने के कारण राशि का भुगतान नहीं हो पाया। खर्च और राजस्व का अधिकृत आंकड़ा तो इस सप्ताह के अंत तक ही आ पाएगा, लेकिन बताया यह जा रहा है कि करीब दो हजार करोड़ के बिलों का भुगतान नहीं हो पाया।

किसानों को नहीं मिला अनुदान
सरकार का किसानों पर जोर रहा, लेकिन हकीकत यह रही कि बजट के आखिरी दिन तक किसानों के खाते में अनुदान राशि नहीं पहुंच पाई। इसकी पुष्टि स्वयं कृषि विभाग के अधिकारियों ने की है और भुगतान की प्रक्रिया अब फिर शुरु होगी।

ईसीएस में अटके बिल: सूत्रों का कहना है कि इलेक्टोनिक क्लीयरिंग सर्विस (ईसीएस) बंद होने से दो हजार करोड़ के बिल अटके हैं। इसमें भीलवाड़ा के 25 करोड़ 78 लाख रुपए बिल शामिल हैं। ईसीएस के माध्यम से एक बैंक खाते से दूसरे खाते में राशि हस्तांतरण की इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया है। इसका उपयोग सरकारी विभागों व संस्थानों ओर से लाभांश ब्याज, वेतन, पेंशन, बिलों अन्य शुल्कों का भुगतान करने के लिए किया जाता है। 31 मार्च को अधिक लोड आने से ईसीएस सिस्टम नहीं चल सका।

संशोधित बजट पहले ही मिल गया
इस बार विधानसभा से लेखानुदान के समय संशोधित बजट भी मिल गया, इससे विभागों का बजट बढ़ गया था। इसका भी विभागों को फायदा मिला। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बार खर्च पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई, इस कारण खर्चा अधिक हुआ है।

भीलवाड़ा में अटका 25.78 करोड़ का भुगतान
भीलवाड़ा कोष कार्यालय में 25 करोड़ 78 लाख 34 हजार के 1150 से अधिक बिलों का भुगतान नहीं हो पाया। इनमें मुख्य रूप से ग्रांट इन एड में पांच करोड़, पीडी खाते के पांच करोड़, कर्मचारियों का वेतन एरियर के एक करोड़, वॉम भुगतान (पूंजीगत कार्य) के 5.57 करोड़, यात्रा बिल के 1.39 करोड़, मेडिकल बिल 1.23 करोड़ एफवीसी के 8.22 करोड़ के बिल शामिल हैं।

सिलिंग के अभाव में अटके बिल
वित्तीय नियंत्रण व सिलिंग के चलते जिले के 25 करोड़ से अधिक के बिल पास नहीं हो सके। ये बिल नए सिरे से बनाकर पेश करने के लिए विभागों को भेजे जाएंगे। 31 मार्च शाम तक जितने भी बिल आए थे, सब पास कर बैंकों में भेज दिए थे।
-सुरेशचन्द्र देसाई, जिला कोषाधिकारी, भीलवाड़ा

ईसीएस बंद होने से अटका भुगतान
भुगतान नहीं होने के पीछे बजट की कमी कारण नहीं थी, बल्कि ईसीएस बंद होने के कारण राशि का हस्तांतरण नहीं हो पाया। इसी कारण बिलों का भुगतान नहीं हो पाया।
-राजू सूद, कोषाधिकारी, सचिवालय, जयपुर

किसानों को नहीं मिला अनुदान
कृषि विभाग की योजना में किसानों को मिलने वाला अनुदान बजट का अभाव होने तथा सिलिंग के कारण नहीं मिल सका है। जितनी राशि खर्च करने के लिए लक्ष्य दिया था, इतनी राशि ही खर्च की गई। उसमें से भी बजट रोक लेने से लगभग 5 करोड़ के बिल जिला कोष कार्यालय में अटक गए हैं। इसकी पुख्ता जानकारी 5 अप्रेल तक मिलेगी।
-जीएल चावला, उपनिदेशक, कृषि विभाग, भीलवाड़ा

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