18 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दान देकर अपने नाम पर करा सकेंगे सरकारी स्कूलों का नामकरण

अब सरकारी स्कूलों में दान देकर स्कूलों पर अपना या परिजनों का नाम लिखवा सकेंगे

2 min read
Google source verification
Education Department's Bhamashah Yojna

Education Department's Bhamashah Yojna

भीलवाड़ा।
शिक्षा विभाग ने दानदाताओं को सरकारी स्कूलों की ओर मोडऩे के लिए भामाशाह योजना शुरू की। इसके तहत मुख्यमंत्री विद्यादान कोष में योगदान पर आयकर अधिनियम की धारा 80 जी के तहत भामाशाह को छूट के साथ ही अब सरकारी स्कूलों में दान देकर स्कूलों पर अपना या परिजनों का नाम लिखवा सकेंगे। वहीं तय राशि जमा करवाने पर पुरस्कार भी ले सकेंगे।


दानदाताओं, भामाशाहों व औद्योगिक संस्थाओं को मदद की एवज में हर साल भामाशाह जयंती पर सम्मानित किया जाएगा। शिक्षा विभाग के शिविरा पंचांग में भी नाम प्रकाशित किया जाएगा। यदि उनकी राशि से निर्माण होता है तो उस पर नाम लिखा जाएगा। विद्यालय के नाम से पूर्व भामाशाह, व्यक्तिगत दानदाता का नाम या उसके द्वारा तय नाम अंकित किया जाएगा। किसी भी स्थिति में राजकीय शब्द नहीं हटाया जाएगा। दान राशि से विद्यालयों में कक्षा कक्ष, खेल मैदान, फर्नीचर, खेलकूद सामग्री, विद्युत, स्वच्छ पेयजल, शौचालय सुविधा व आईसीटी लैब में कम्प्यूटर लगाए जाएंगे।

राज्य सरकार करेगी अंतिम निर्णय
नामकरण के लिए विद्यालय विकास एवं प्रबंध समिति, विद्यालय प्रबंध समिति के माध्यम से भामाशाह के दान तथा कार्यों का अनुमोदन कर प्रधानाचार्य जिला शिक्षा अधिकारी को भेजेंगे। फिर प्रस्ताव माध्यमिक-प्रारंभिक शिक्षा निदेशक को भेजा जाएगा। राज्य सरकार अंतिम निर्णय लेगी। विभाग की इस योजना से स्कूल में आधारभूत संसाधन विकसित होने की उम्मीद है।

इतनी राशि पर होगा नामकरण
30 लाख या अधिक -प्रा. स्कूल
60 लाख या अधिक-मिडिल स्कूल
1.50 करोड़ या अधिक- सै. स्कूल
2 करोड़ या अधिक-उ मा विद्यालय


ऐसे मिलेंगे पुरस्कार
पुरस्कार - दान राशि
शिक्षा मित्र - 5 हजार से 25 हजार
शिक्षा साथी - 25 हजार से 1 लाख
शिक्षा श्री - 1 लाख से 15 लाख
शिक्षा भूषण -15 लाख से 1 करोड़
शिक्षा विभूषण -एक करोड़ से अधिक

स्कूलों का होगा कायाकल्प
भामाशाहों के सहयोग से सरकारी स्कूलों में सभी सुविधाएं होगी तथा स्कूल स्तर पर नए नवाचार किए जा सकेंगे। जिले की स्कूलों का कायाकल्प तो होगा ही साथ ही संसाधनों की कमी भी दूर होगी।
अशोककुमार, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक (प्रथम), भीलवाड़ा