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Will You Merry Me : “बुजुर्गों का अनोखा विवाह सम्मेलन: 50 से 80 साल की उम्र में तलाश रहे जीवनसाथी, कल भीलवाड़ा में परिचय सम्मेलन

Senior Citizen Matrimonial Meet: साल 2002 से शुरू हुए इस सफर में अब तक 94 सम्मेलन हो चुके हैं, जिसमें 16 हजार से अधिक बुजुर्गों ने हिस्सा लिया और 224 जोड़े विवाह के बंधन में बंध चुके हैं।

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राजस्थान में इस तरह का पहला परिचय सम्मेलन हो रहा है, एआई की मदद से प्रतीकात्मक तस्वीर...

राजस्थान में इस तरह का पहला परिचय सम्मेलन हो रहा है, एआई की मदद से प्रतीकात्मक तस्वीर...

Bhilwara News: कहते हैं कि साथ निभाने के लिए कोई उम्र छोटी या बड़ी नहीं होती, बस एक हमसफ़र की ज़रूरत होती है जो अकेलेपन के साये को दूर कर सके। राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में एक ऐसी ही अनूठी पहल होने जा रही है, जहाँ 50 से 80 साल के बुजुर्ग अपने जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत करने के लिए एक-दूसरे का हाथ थामेंगे। अहमदाबाद की 'अनुबंध फाउंडेशन' संस्था के तत्वावधान में भीलवाड़ा में पहली बार बुजुर्ग विवाह परिचय सम्मेलन का आयोजन रविवार को होने जा रहा है। नागौरी गार्डन स्थित स्वाध्याय भवन में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में अजमेर संभाग के 80 से अधिक बुजुर्गों ने अपना पंजीकरण कराया है।

अकेलेपन को मात देने की 'अनोखी पहल'

अक्सर जीवन के आखिरी पड़ाव पर बुजुर्ग खुद को अकेला महसूस करते हैं। इसी अकेलेपन को दूर करने के लिए संस्था ने यह बीड़ा उठाया है। इस सम्मेलन में 50 वर्ष से अधिक आयु के अविवाहित, विधवा, विधुर और तलाकशुदा महिला-पुरुष शामिल हो रहे हैं। आयोजन के दौरान न केवल परिचय कराया जाएगा, बल्कि आपसी सहमति बनने पर उनकी कोर्ट या मंदिर में शादी भी कराई जाएगी।

आयोजन की खास बातें:

  • निशुल्क व्यवस्था: बाहर से आने वाले बुजुर्गों के लिए रहने और खाने की व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क है।
  • किराये में मदद: यदि किसी बुजुर्ग के पास आने-जाने का किराया नहीं है, तो संस्था यात्रा का 50% खर्च भी वहन करेगी।
  • पारदर्शिता: परिचय के बाद व्यक्तिगत बैठकें होंगी ताकि दोनों पक्ष एक-दूसरे को समझ सकें। पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही रिश्ते को आगे बढ़ाया जाएगा।
  • दस्तावेज: भाग लेने वाले बुजुर्गों को अपनी फोटो, आधार कार्ड और पूर्व जीवनसाथी का मृत्यु प्रमाणपत्र या तलाक के कागज साथ लाने होंगे।

2001 के भूकंप से उपजा यह विचार

संस्था के अध्यक्ष नंदूभाई पटेल ने बताया कि इस नेक काम की प्रेरणा उन्हें 2001 के गुजरात भूकंप के दौरान मिली। उस त्रासदी में कई लोगों ने अपने जीवनसाथी खो दिए थे। तब उन्होंने महसूस किया कि बुजुर्गों के लिए भी एक ऐसा मंच होना चाहिए जहाँ वे अपना साथी चुन सकें। साल 2002 से शुरू हुए इस सफर में अब तक 94 सम्मेलन हो चुके हैं, जिसमें 16 हजार से अधिक बुजुर्गों ने हिस्सा लिया और 224 जोड़े विवाह के बंधन में बंध चुके हैं। भीलवाड़ा में हो रहा यह आयोजन समाज की उस सोच को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जहाँ बुजुर्गों की खुशियों और उनकी भावनात्मक जरूरतों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।