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अठारह साल में भी शाहपुरा बस स्टैंड यात्रियों से दूर

Shahpura bus stand नवगठित शाहपुरा जिले में लोकार्पण के अठारह साल बीतने के बावजूद केंद्रीयकृत बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए सुविधा नगण्य है। यहां न केवल स्टाफ की कमी है बल्कि बिजली, पानी तक की सुविधा नहीं है।

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अठारह साल में भी शाहपुरा बस स्टैंड यात्रियों से दूर

अठारह साल में भी शाहपुरा बस स्टैंड यात्रियों से दूर

नवगठित शाहपुरा जिले में लोकार्पण के अठारह साल बीतने के बावजूद केंद्रीयकृत बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए सुविधा नगण्य है। यहां न केवल स्टाफ की कमी है बल्कि बिजली, पानी तक की सुविधा नहीं है। सफाई के अभाव में सुलभ शौचालय से भी यात्री दूर रहते हैं। सुविधाओं की कमी से यात्रियों की आवाजाही कम होने का असर यह पड़ा कि बसों का ठहराव भी कम है।

जिला मुख्यालय बनने के बाद जो सुविधाएं प्रारंभिक स्तर पर होनी चाहिए, वह अभी भी कोसों दूर है। यहां बनेड़ा मार्ग पर कॉलेज के समीप नगर पालिका ने 18 वर्ष पूर्व आईडीएस एमटी योजना के तहत केंद्रीयकृत बस स्टैंड का निर्माण करवाया था। निर्माण पर एक करोड रुपए से अधिक की लागत आई थी।

नहीं खुल सकी दुकानें

पालिका ने यहां कैंटीन व अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आठ दुकानें बनाई, जो आज भी बंद है। यहां स्टैंड परिसर में यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। भवन परिसर में बुकिंग व स्टाफ कक्ष सूने पड़े हैं। यहां बस स्टैंड परिसर की सड़क भी क्षतिग्रस्त है और सफाई भी नहीं होती है। सुलभ शौचालय की भी हालत खराब है।

बसों का ठहराव कम
प्रतिदिन जयपुर,उदयपुर,कोटा,अजमेर जैसे प्रमुख शहर के लिए 50 से अधिक रोडवेज बसें शाहपुरा आती है। लेकिन यहां यात्रियों की आवाजाही कम होने से बसों का ठहराव भी कम रहता है। अधिकांश यात्री नगर के चौराहों से ही बस में सवार होते हैं। यहां निजी बसों का जमावड़ा भी रहता है। सांझ ढलते ही आवारा तत्वों का भी यहां डेरा रहता है।
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मुख्यालय को लिखा है
शाहपुरा केन्द्रीय बस स्टैंड की सुविधाओं के विस्तार एवं बसों के ठहराव की संख्या बढ़े, इसके लिए मुख्यालय को लिखा है। बस स्टैंड के प्रबंधक की नियुक्ति का फैसला सरकार करेगा।
- पुर्णेन्द्र शर्मा, महाप्रबंधक, भीलवाड़ा आगार