भीलवाड़ा. एक जमाना था जब भारत ही नहीं दुनियाभर में साइकिल का क्रेज था। अब इनकी जगह स्कूटर-मोटरसाइकिल और कारों ने ले ली। लेकिन अब फिर से पर्यावरण व सेहत को लेकर लोग साइकिल की ओर आने लगे हैं। हालांकि साइकिल को अब भी मध्यम वर्ग का परिवहन मानते हैं। कुछ लोग शौक से साइकिल चलाते हैं।
शनिवार को विश्व साइकिल दिवस मनाया गया। संयुक्त राष्ट्र ने पहला आधिकारिक विश्व साइकिल दिवस 3 जून 2018 को मनाया था। विश्व साइकिल दिवस पर भीलवाड़ा शहर के दो ऐसे व्यक्ति से चर्चा की है जो लगभग 88 साल की उम्र में भी साइकिल से अपना काम करते हैं।
मेरी सांस है साइकिल- चटुल
शास्त्रीनगर निवासी 88 साल के रतनकुमार चटुल आज भी रोजाना साइकिल चलाते हैं। उनका मानना है कि साइकिल उनकी सांस है। रोज नित्यकर्म के बाद 8 बजे इनकी साइकिल रेस शुरू होती जो शाम 7:30 बजे तक 20 किलोमीटर दूरी तय करने के बाद खत्म होती है। चटुल 1948 से साइकिल चला रहे हैं। पहली साइकिल उनके भाई ने नीमच से 92.50 रुपए में लाकर दी थी। चटुल का कहना है कि विश्व साइकिल दिवस भी एक मात्र का दिखावा हो गया है। कई लोग केवल दिखावे के लिए चलाते हैं। 88 साल की उम्र में अपने मित्रों से मिलने साइकिल पर जाते हैं। इसके लिए वे रोज चार घंटे अपने पांच मित्रों के घर जाकर उनसे कुशलक्षेम पूछने व चाय पर राजनीति व साहित्य सबंधी चर्चा करते हैं। चटुल को कविता लिखने का पुराना शौक हैं। इसके चलते उन्हें लोग जन कवि चटुल के नाम से भी पुकारते हैं। हमीरगढ, पुर, सुवाणा, सांगानेर समेत आस-पास भी साइकिल पर जाते हैं।
88 साल के काशीलाल आज भी चलाते हैं साइकिल
आरके कॉलोनी निवासी व अंग्रेजी के पूर्व शिक्षक काशीलाल शर्मा (गुरुदेव) आज भी 88 साल की उम्र में साइकिल चलाते हैं। शर्मा कई देशों की यात्रा कर चुके हैं। जहां भी जाते हैं वहां पर अपना काम साइकिल पर करते हैं। वे 12-13 साल की उम्र से साइकिल चला रहे हैं। पांच महाद्वीप के 26 देशों की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनका काम वे स्वयं साइकिल पर जाकर करते हैं। वे 1975 में एक माह के लिए जब डेनमार्क गए तो वहां भी साइकिल पर ही स्कूल आते-जाते थे। वहां पर बच्चों को भारत के बारे में जानकारी देते थे। अमरीका चार बार जा चुके हैं। 53 साल की उम्र में टीचर ग्रुप में चयन होने पर अमरीका गए थे। विदेशों में साइकिल को शौक से चलाते हैं लेकिन भारत में इसे पूरी तरह से नहीं अपनाया है। लोग आज भी साइकिल को मध्यम परिवार का मानते हैं। हालांकि भीलवाड़ा में डॉक्टर, सीए, इंजीनियर, समेत अन्य लोग सुबह के समय साइकिल पर घूमने जाते हैं।
साइकिल क्लब
भीलवाड़ा में फरवरी 2015 को साइकिल क्लब का गठन किया था। इसमें पहले 25 सदस्य थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 300 से अधिक हो गई है। इस क्लब में अरुण मुछाल, बाबूलाल जाजू, त्रिलोकचंद छाबड़ा, मोहनलाल, काशीलाल शर्मा, लीलाराम अडानी, समेत अन्य वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं।