इनका स्वाद अलग
शहर में दही, कढ़ी, चटनी, नवरतन व लहसुन की चटनी के साथ कचौरी खाई जाती है। कम मिर्च के मिर्ची बडे भी काफी पंसद किए जाते हैं। महावीर पार्क के पास प्याज की कचौरी लाल मीठी चटनी और हरी तीखी चटनी के साथ ऊपर से दही डालकर परोसी जाती है। पेच एरिया में शाही समोसा, खस्ता कचौरी-चटनी के साथ और हींग का पानी भी दिया जाता है। गोल प्याऊ चौराहे पर एक व्यापारी की कचौरी का अलग स्वाद है। यहां लकड़ी के गट्टों को डालकर सिगड़ी की धीमी आंच पर कचौरी व मिर्ची बड़े सेके जाते हैं। इसके कारण यहां ग्राहकों को इंतजार करना पड़ता है।