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भीलवाड़ा का हर दसवां शख्स रोजाना खाता है कचौरी

हर दुकान का अपना स्वाद, चटनी के साथ लोग लेते हैं चटखारे50 हजार कचौरी रोजाना बनती है भीलवाड़ा में, पांच लाख आबादी शहर की7.50 लाख रुपए की प्रतिदिन कचौरी खा जाते हैं लोग
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 22 Nov 2022, 6:36 PM IST

भीलवाड़ा का हर दसवां शख्स रोजाना खाता है कचौरी

भीलवाड़ा का हर दसवां शख्स रोजाना खाता है कचौरी

भीलवाड़ा. भीलवाड़ावासी कचौरी के शौकीन हैं। यहां लोग जितने तरह के स्वाद पसंद करते हैं, उतने ही तरीके की कचौरियां बनती है। हर दुकान का अपना अलग स्वाद, जिसे लोग चटखारे लेकर खाते हैं। किसी को तेज मसाला पसंद है तो किसी को मध्यम या कम। कोई कुरारी तो कोई मुलायम कचौरी पसंद करता है। कहीं दाल तो कहीं प्याज की कचौरी चलन में है। शहर का हर दसवां शख्स रोजाना एक कचौरी खाता है। बड़ी संख्या में लोग सुबह की शुरुआत कचौरी से करते हैं। शहर में दो दर्जन से अधिक जगह कचौरी की प्रसिद्ध दुकानें चलती है। हर चौराहे पर अलग-अलग स्वाद। कचौरी के साथ मिर्ची बड़े, आलू बड़े व समोसे भी पसंद किए जाते हैं। पांच लाख की आबादी वाले शहर में रोजाना 50 हजार कचौरियां बनती है।

इनका स्वाद अलग
शहर में दही, कढ़ी, चटनी, नवरतन व लहसुन की चटनी के साथ कचौरी खाई जाती है। कम मिर्च के मिर्ची बडे भी काफी पंसद किए जाते हैं। महावीर पार्क के पास प्याज की कचौरी लाल मीठी चटनी और हरी तीखी चटनी के साथ ऊपर से दही डालकर परोसी जाती है। पेच एरिया में शाही समोसा, खस्ता कचौरी-चटनी के साथ और हींग का पानी भी दिया जाता है। गोल प्याऊ चौराहे पर एक व्यापारी की कचौरी का अलग स्वाद है। यहां लकड़ी के गट्टों को डालकर सिगड़ी की धीमी आंच पर कचौरी व मिर्ची बड़े सेके जाते हैं। इसके कारण यहां ग्राहकों को इंतजार करना पड़ता है।

बदले मौसम में गर्म कचौरी का बाजार भी चढ़ रहा है। कई व्यापारियों के यहां कड़ाई में कचौरी पकते ही पल भर में समाप्त हो जाती है। आने वाले ग्राहकों को अगली कड़ाई की कचौरियों के लिए इंतजार करना पड़ता है।