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धनोप माता के दरबार में होती हर मन्नत पूरी

Every wish was fulfilled in Dhanop Mata's court फूलियाकलां तहसील में धनोप गांव स्थित धनोप माता का एतिहासिक व चमत्कारिक मंदिर है। मान्यता है कि नवरात्र के दिनों में धनोप माता के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी हो जाती है। यहां विभिन्न बीमारियों व ऊपरी हवा से ग्रस्त लोग भी समस्या से मुक्ति के लिए आते है।

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Every wish was fulfilled in Dhanop Mata's court.

Every wish was fulfilled in Dhanop Mata's court.


भीलवाड़ा। फूलियाकलां तहसील में धनोप गांव स्थित धनोप माता का एतिहासिक व चमत्कारिक मंदिर है। यह प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है। यहां पूरे साल बड़ी संख्या में देश के विभिन्न हिस्सों से भक्त एवं श्रृद्धालु आते है। ऐसी मान्यता है कि नवरात्र के दिनों में धनोप माता के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी हो जाती है। यहां विभिन्न बीमारियों व ऊपरी हवा से ग्रस्त लोग भी समस्या से मुक्ति के लिए आते है।

नवरात्रों में २४ घंटे रहती जाग

यहां के बड़े-बुजुर्ग बताते है कि धनोप माता मंदिर का निर्माण कन्नौज नरेश जयचंद ने करवाया था। धनोप मंदिर की देवी की चमत्कारी प्रतिमा में आस्था रखने के कारण भक्तजनों ने इसके चारों ओर अनेक निर्माण कार्य करवाए है। धनोप माता के इस मंदिर पर वैसे तो साल भर भक्तजन मनौतियां मनाने आते रहते है और मनवांछित फ ल पाते हैं। नवरात्रों के अवसर पर यहां भक्तजनों की संख्या काफ ी बढ़ जाती है। आस पास के जिलों सहित काफ ी दूर-दूर से भक्त यहां अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए आते है। जिसके फ लस्वरूप नवरात्रों में यहां का प्रांगण मेला स्थल में तब्दील हो जाता है और यहां चौबीस घंटे पूजा पाठ आदि धार्मिक आयोजन होते है।

धनोप का प्राचीन किला

धनोप गांव में एक प्राचीन किला भी है जो अपनी विशेषता लिए हुए है। मध्यकालीन राजस्थानी परम्परा के प्रतिकूल यहां किले की दीवारें पत्थर के स्थान पर पक्की ईंटों से बनी है। धनोप केवल वैष्णव, शैव और शक्ति पूजा का ही केंद्र नहीं, वरन यह श्वेताम्बर जैन संम्प्रदाय की आस्था का भी केंद्र रहा है। यहां के उत्तर मध्ययुगीन श्वेताम्बर जैन मंदिर के गर्भगृह में 10 वी शताब्दी से लेकर 14 वी शताब्दी की प्रतिमाएं है। जिनमें काले पत्थर की चार पाश्र्वनाथ प्रतिमाएं और गौमुख पक्ष की प्रतिमा विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

खुदाई में मिले सिक्कें

धनोप प्रारंभ से ही एक प्रमुख सांस्कृतिक केन्द्र और तीर्थ रहा है। वैसे तो धनोप गांव मे खुदाई के दौरान अनेक प्राचीन और ऐतिहासिक वस्तुएं प्राप्त हुई है। बागौर की भांति धनोप के पास पंचदेवरा नामक रेतीले टीलों पर उत्तर पाषाण कालीन मानव का निवास था।


जानकार बताते है कि धनोप राजा धुंधु की राजधानी थी। मार्कण्डेयपुराण में एक धुंधु नामक असुर का उल्लेख मिलता हैं। जो गालव ऋ षि के आश्रम गलताजी जयपुर के निकट के आसपास उत्पात मचाया करता था। इस धुंधु नामक असुर राजा को नागराज कुमार द्वारा मारे जाने का उल्लेख भी उक्त पुराण मे मिलता है। गत वर्षों में धनोप ग्राम के एक मकान के आंगन में लगभग 4 फ ीट नीचे खुदाई में तीस चांदी के सिक्के मिले है।