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जिले के कनिष्ठ तकनीकी सहायकों से छीने वित्तीय अधिकार, विरोध में उतरे हड़ताल पर

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने संविदा पर लगे कनिष्ठ तकनीकी सहायकों (जेटीए) से वित्तीय अधिकार छीन लिए

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ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने एक आदेश जारी कर संविदा पर लगे कनिष्ठ तकनीकी सहायकों (जेटीए) से वित्तीय अधिकार छीन लिए।

भीलवाड़ा।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने एक आदेश जारी कर संविदा पर लगे कनिष्ठ तकनीकी सहायकों (जेटीए) से वित्तीय अधिकार छीन लिए। मस्टरोल जारी करने व एमबी बुक की जांच करने के काम की जिम्मेदारी कनिष्ठ व सहायक अभियन्ता को देखनी होगी। सरकार के इस आदेश के बाद कुछ जिला परिषदों ने तो अपने स्तर पर ही संविदा पर लगे कनिष्ठ तकनीकी सहायकों को अधिकार दे रहे है, लेकिन वे बिना लिखित आदेश के काम करने को तैयार नहीं है।

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इस आदेश के बाद प्रदेश के सभी जेटीए ने हड़ताल कर दी है। भीलवाड़ा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गजेन्द्रसिंह राठौड़ के आश्वासन के जिले के सभी 52 कर्मचारी काम पर तो लौट गए, लेकिन काम कुछ भी नहीं कर सके। महात्मा गांधी नरेगा कार्मिक संघ राजस्थान (तकनीकी शाखा) के महामंत्री गोपालचन्द साधु ने बताया कि पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुदर्शन सेठी ने 27 मार्च को आदेश जारी कर संविदा पर कार्यरत कनिष्ठ तकनीकी सहायकों के कार्यो के मूल्यांकन व जांच के अधिकारों में शेड्यूल ऑफ पावर के तहत परिवर्तन करते हुए वित्तीय अधिकार छीन लिए गए।

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जबकि यह अधिकार वर्ष 2008-09 से उनके पास थे। इसके चलते प्रदेश के सभी 13 सौ जेटीए ने हड़ताल कर दी है। जेटीए को लिखित में आदेश दिलाने के लिए राठौड़ को ज्ञापन भी दिया गया। बाद में सभी कर्मचारियों की एक बैठक मुखर्जी उद्यान में भी हुई।


यह है नए आदेश
आदेश के अनुसार मूल्यांकन जांच कर प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार अब 5 लाख तक जेईएन, 15 लाख तक एईएन, 50 लाख तक अधिशासी अभियन्ता, एक करोड़ तक अधीक्षण अभियन्ता को दिए गए है। जबकि पहले पांच लाख तक के अधिकार संविदा पर लगे जेटीए के पास थे। जो अब समाप्त कर दिए गए ।