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बैंक में करोड़ों के घपले में पूर्व चैयरमेन कीर्ति, पति समेत गिरफ्तार

भीलवाड़ा महिला अरबन को-ऑपरेटिव बैंक की पूर्व चैयरमेन कीर्ति बोरदिया एवं उनके पति एवं बैंक वित्तीय सलाहकार रवि बोरदिया को कोतवाली पुलिस ने बैंक में साढ़े तीन करोड़ रुपए के घोटाले के चार साल पुराने मामले में जोधपुर से गिरफ्तार किया। कीर्ति बोरदिया की पुलिस को प्रकरण में वर्ष २०१६ से तलाश थी। जबकि पति रविन्द्र बोरदिया पूर्व में भी बैंक घपले से जुड़े एक अन्य मामले में गिरफ्तार हो चुके है।

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Former chairman Kirti, along with husband arrested in crores of crores

Former chairman Kirti, along with husband arrested in crores of crores

भीलवाड़ा। भीलवाड़ा महिला अरबन को-ऑपरेटिव बैंक की पूर्व चैयरमेन कीर्ति बोरदिया एवं उनके पति एवं बैंक वित्तीय सलाहकार रवि बोरदिया को कोतवाली पुलिस ने बैंक में साढ़े तीन करोड़ रुपए के घोटाले के चार साल पुराने मामले में जोधपुर से गिरफ्तार किया। कीर्ति बोरदिया की पुलिस को प्रकरण में वर्ष २०१६ से तलाश थी। जबकि पति रविन्द्र बोरदिया पूर्व में भी बैंक घपले से जुड़े एक अन्य मामले में गिरफ्तार हो चुके है।

कोतवाली प्रभारी नेमीचंद चौधरी ने बताया कि कोतवाली में परिवादी मनोज पारख ने २० दिसम्बर २०१२ को एक प्रकरण कीर्ति व रविन्द्र बोरदिया आदि के खिलाफ दर्ज कराया था। परिवादी का आरोप था कि बैंक चैयरमेन रहते हुए कीर्ति ने पति रविन्द्र बोरदिया जो कि बैंक के वित्तीय सलाहकार थे, उसकी सांठगांठ से नाकोड़ा एंटरप्राइजेज नाम से फर्जी फर्म बनाई और इसमें ७३ महिलाओं के नाम फर्जी तरीके से जोड़ते हुए बैंक से तीन करोड़ ५० लाख ७७ हजार २५० रुपए का लोन उठा लिया। प्रकरण में बोरदिया दंपती की तलाश थी।

कोतवाली प्रभारी ने बताया कि आरोपित बोरदिया दंपती के जोधपुर में रातानाडा क्षेत्र में रहने की सूचना मुखबीर के जरिए मिली। सूचना के आधार पर पुलिस ने वांछित ठिकाने पर दबिश दी। यहां आरोपित दंपती मकान के बाहर ही मिल गए। दोनों को गिरफ्तार कर शनिवार शाम को जोधपुर से भीलवाड़ा लाया गया। दोनों से प्रकरण में पूछताछ की जा रही है।


भीलवाड़ा महिला अरबन को-ऑपरेटिव बैंक में पूर्व चैयरमेन कीर्ति बोरदिया के कार्यकाल में करीब ५० करोड़ रुपए का मामला उजागर होने के बाद से बैंक वित्तीय लेन देन के लिए बंद है। बोरदिया दंपती समेत अन्य के खिलाफ कुल ३० प्रकरण दर्ज है। इनमें एसओजी व कोतवाली कुछ प्रकरणों में जांच कर रही है, जबकि कुछ मामले न्यायालय में विचाराधीन है, कुछेक मामले आपसी स्तर पर निपटाए गए। सहकारिता विभाग ने बैंक में २५.१० करोड़ तथा एसओजी ने ५० करोड़ का घोटाला माना है।

बैंक में करोड़ों की वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद निवेशक भी विरोध में सड़क पर आ गए थे, विरोध स्वरूप धरने एवं प्रदर्शन भी हुए।