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श्राद्ध पक्ष 2 से ,  एक माह बाद नवरात्र

शुभ और मांगलिक काम भी नहीं किए जा सकते  
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

•

Updated: 31 Aug 2020, 4:02 AM IST

From Shraddha Paksha 2, Navratri a month later in bhilwara

From Shraddha Paksha 2, Navratri a month later in bhilwara

भीलवाड़ा .

इस बार पितृपक्ष की शुरुआत 2 सितंबर से हो रही है जो 17 सितंबर तक रहेगा। इन दिनों में पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध किया जाएगा। पंडित अशोक व्यास के अनुसार श्राद्धपक्ष में शुभ और मांगलिक काम भी नहीं किए जा सकते हैं। इस बार तिथियों की घट-बढ़ के बावजूद पितरों की पूजा के लिए 16 दिन मिल रहे हैं। आमतौर पर पितृपक्ष खत्म होते ही अगले दिन से नवरात्र शुरू हो जाती है। लेकिन इस बार 19 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब पितृपक्ष के खत्म होने के एक महीने बाद नवरात्र शुरू होंगे। इससे पहले 2001 में ऐसा हुआ था जब 2 से 17 सितंबर तक पितृपक्ष था और नवरात्र 17 अक्टूबर को थी। इस साल भी तिथियों और तारीखों का ये दुर्लभ संयोग बन रहा है। अधिक मास होने के कारण ऐसी स्थिति बनती है।
श्राद्धपक्ष में वायु रूप में आते हैं पितृ
भाद्रपद माह के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा से सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या तक 16 दिनों को पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष कहा जाता है। व्यास ने बताया कि ब्रह्म पुराण के अनुसार श्राद्धपक्ष के 16 दिनों में पितृ वंशजों के घर वायु रूप में आते हैं। इसलिए उनकी तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और पूजा-पाठ करने का विधान है। इस बार पितृपक्ष में पूर्णिमा का श्राद्ध मंगलवार को होगा। इस दिन पूर्णिमा सुबह साढ़े 9 बजे के बाद शुरू होगी जो कि अगले दिन सुबह करीब 11 बजे तक रहेगी। इसलिए पूर्णिमा का श्राद्ध 1 और 2 सितंबर को भी किया जा सकेगा।
क्या है पितृपक्ष
पितृ पक्ष अपने कुल, परंपरा और पूर्वजों को याद करने और उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लेने का समय है। इसमें व्यक्ति का पितरों के प्रति श्रद्धा के साथ अर्पित किया गया तर्पण यानी जलदान और पिंडदान यानी भोजन का दान श्राद्ध कहलाता है। पूर्वजों की पूजा और उनकी तृप्ति के लिए किए गए शुभ कार्य जिस विशेष समय में किए जाते हैं उसे ही पितृपक्ष कहा गया है। पंडित अशोक व्यास ने बताया कि पितरों की तृप्ति के लिए ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए। पितरों को जलांजलि दी जाना चाहिए। परिवार के मृत सदस्य की तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करना चाहिए। अगर तिथि नहीं पता हो तो सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या १७ सितंबर को श्राद्ध किया जा सकता है। इन 16 दिनों में जरूरतमंदों को भोजन बांटना चाहिए। पितरों का श्राद्ध और पिंडदान करने तथा ब्राह्मणों को भोजन कराने से पितरों की आत्माएं तृप्त होती हैं।