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सहाड़ा उपचुनाव में कांग्रेस को गायत्री का सहारा

तीन बार सहाड़ा विधायक रह चुके दिवंगत विधायक कैलाश त्रिवेदी की धर्म पत्नी गायत्री देवी को कांग्रेस ने सहाड़ा उप चुनाव में भाजपा प्रत्याशी डॉ. रतन लाल जाट के सामने उतारा है। गायत्री को टिकट मिलने से नाराज कुछ कांग्रेस जनों ने रविवार को जयपुर में विरोध दर्ज कराया है।

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Gayatri's support to Congress in Sahada by-election

Gayatri's support to Congress in Sahada by-election

भीलवाड़ा। तीन बार सहाड़ा विधायक रह चुके दिवंगत विधायक कैलाश त्रिवेदी की धर्म पत्नी गायत्री देवी को कांग्रेस ने सहाड़ा उप चुनाव में भाजपा प्रत्याशी डॉ. रतन लाल जाट के सामने उतारा है। गायत्री को टिकट मिलने से नाराज कुछ कांग्रेस जनों ने रविवार को जयपुर में विरोध दर्ज कराया है।

दूसरी तरफ वरिष्ठ नेता लादूलाल पितलिया ने बगावती तेवर दिखातेे हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडऩे की घोषणा करते हुए भाजपा में हडकम्प मचा दिया। पितलिया ने २०१८ के चुनाव में भी टिकट नहीं मिलने पर बगावत करते हुए चुनाव लड़ा था। यह सीट बाद में भाजपा को खोनी पड़ी। दोनों ही प्रत्याशी ३० मार्च को गंगापुर उपखंड मुख्यालय पर नामांकन पत्र पेश करेंगे।


सहाड़ा उपचुनाव को लेकर कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व ने शनिवार दोपहर दिवंगत विधायक कैलाश त्रिवेदी की धर्म पत्नी गायत्री देवी के नाम पर मुहर लगा दी। इसके साथ ही राजनीतिक गलियारे में त्रिवेदी परिवार के विभिन्न सदस्यों के नाम को लेकर उठ रहे कयासों का पटाक्षेप भी हो गया। केन्द्रीय व प्रदेश नेतृत्व ने पार्टी के प्रति दिवंगत कैलाश त्रिवेदी के जीवट सहयोग को दृष्टिगत रखते हुए अन्य नामों को खारिज करते उनकी पत्नी गायत्री देवी पर ही भरोसा जताया।

पति के साथ राजनीति में सक्रिय रही

त्रिवेदी परिवार की राजनीति में जड़े दिवंगत कैलाश त्रिवेदी के दादा के समय से मजबूत होने से गायत्री देवी की भी सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र में जड़े मजबूत है। वह वर्ष २००० में रायपुर प्रधान चुनी और वर्ष २००५ तक कार्यरत रही। प्रधान कार्यकाल के दौरान ही गायत्री देवी को राष्ट्रपति सुमित्रा महाजन ने सम्मानित किया। ६४ वर्षीय गायत्री देवी ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष रही। बीस सूत्रिय कार्यक्रम की सदस्य भी रही।


पितलिया बोले, पार्टी ने किया अन्याय, लडेंगे चुनाव

भाजपा के नेता लादूलाल पितलिया ने टिकट नहीं मिलने से फिर से पार्टी में बगावती तेवर दिखाए, उन्होंने गंगापुर में अपने समर्थकों के बीच बैठक में पार्टीका टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी जताई और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडऩे की घोषणा की। पितलिया ने पत्रिका को बताया कि पार्टी ने पहले बुलाया, पार्टी में फिर सदस्यता दिलाई, पैनल में नाम भी भिजवाया, लेकिन बाद में नाम ही काट दिया। उनके साथ फिर से पार्टी ने अन्याय किया है।

पितलिया की फिर से हुई पार्टी में वापसी

पितलिया ने वर्ष २०१८ में भी पार्टी से टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने टिकट रूपलाल जाट को दिया। पितलिया ने इस पर पार्टी में बगावत की और निर्दलीय चुनाव लड़े, ३०,५७३ वोट लाए, यहां भाजपा को सीट गंवानी पड़ी और कांग्रेस के कैलाश त्रिवेदी तीसरी बार चुनाव जीते, भाजपा ने बाद में पितलिया को पार्टी से निष्कासित कर दिया। लेकिन कोरोना संक्रमण काल में त्रिवेदी का असामयिक निधन हो गया। सहाड़ा उप चुनाव को देखते हुए भाजपा ने पितलिया को फिर से पार्टी में शामिल कर लिया था।