
स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आम-आदमी अपनी जी तोड़ मेहनत से कमाई को बचाकर महंगे फल खरीदता है। उसे इस बात का कतई भान नहीं होता कि इन फलों से उसे स्वास्थ्य लाभ नहीं हो रहा बल्कि उन्हें कई बीमारियों का शिकार बना रहा है।
पूरे प्रदेश में फल और सब्जियों में रासायनिक और कीटनाशकों का प्रयोग प्रति वर्ष बढ़ता जा रहा है जिससे अलवर जिला भी शामिल हैं। किसान अधिक उपज लेने के लिए अधिक रसायनों का प्रयोग कर रहा है तो व्यापारी जल्दी और अधिक मुनाफे के लिए फलों को जहरीली गैसों से पका रहे हैं।
प्रदेश की सभी सब्जी मंडियों में कार्बेट यानि मीथेन गैस से पपीता पकाया जा रहा है जबकि इसके उपयोग पर पूरी तरह रोक लगी हुई है। इसी प्रकार आम और केले को इथाइलीन से पकाया जा रहा है। सेहत के लिए अच्छे माने जाने वाले अंगूर और तरबूज सहित अन्य फलों में चमक लाने के लिए केमिकल काम में लिया जाता है।
व्यापारियों को नहीं पूरी जानकारी
सब्जी मंडियों में फलों को पकाने के लिए चाइनीज पुडिया बाजार में आ रही है जिसे पानी में गीला करके फलो में बीच में रख दिया जाता है। फलों को पकाने के काम में आने वाली चाइनीज पुडियाओं की जानकारी नहीं है। प्रदेश की सभी सब्जी मंडियों में इस तरह की चाइनीज पुडिय़ा बिक रही हैं।
व्यापारियों को यह तक पता नहीं है कि फलों को पकाने में वे जिस गैस का प्रयोग कर रहे हैं, इसके अधिक प्रयोग बढऩे पर किस प्रकार इंसानों के लिए घातक हो सकता है। कृषि व स्वास्थ्य विभाग ने व्यापारियों को फलों को पकाने में अधिक गैसों के प्रयोग बढऩे के खतरे बताए नहीं गए हैं।
सब्जियों को पकाने के लिए बढ़ रहा रसायनों को प्रयोग
अलवर जिले में सब्जियों को जल्दी पकाने के लिए रसायनों का प्रयोग निरन्तर बढ़ता जा रहा है। उर्वरकों के बढ़ते प्रयोग से होने वाले दुष्परिणामों की किसानों को परवाह नहीं है और ना ही आम आदमी को इसकी जानकारी है। कीटनाशक रासायनिक या जैविक पदार्थों का ऐसा मिश्रण है जिसका प्रयोग कृषि क्षेत्र में पेड- पौधों को बचाने के लिए बहुत किया जाता है। रासायनिक पदार्थों के अधिक प्रयोग से अलवर जिले में भी पारिस्थितिक संतुतन बिगड़ रहा है।
5 हजार क्विंटल आते हैं फल
अलवर जिले में प्रतिदिन 5 हजार क्विंटल फल आते हैं। अधिक खपत वाले फलों में केले, आम और तरबूज मुख्य हैं। अलवर जिले के व्यापारी बाहर से केले और आम मंगाकर उन्हें दवाइयों के सहारे पकाते हैं। अलवर जिले में दिल्ली से फल आते हैं। अलवर से प्रतिदिन कई क्विंटल सब्जियां दिल्ली जाती हैं। दिल्ली के समीप होने के कारण वहां अलवर की सब्जियों की विशेष मांग रहती हैं।
बढ़ रहा हर साल प्रयोग
देश में कीटनाशकों की खपत हर साल बढ़ती जा रही है। देश में 1950 में इसकी खपत 2 हजार टन थी जो अब डेढ करोड़ हैक्टेयर हो गई है। ये कीटनाशक पानी, मिट्टी, आम आदमी के स्वास्थ्य और जैव विविधता को प्रभवित कर रहे हैं।
अलवर जिले में वर्तमान में कीटनाशकों के विक्रय की दुकानें प्रति वर्ष बढ़ती जा रही है। कृषि उप निदेशक विस्तार पीसी मीणाा का कहना है कि सभी कीटनाशक दवाओं पर वैज्ञानिक चेतावनी लिखी जाती है कि इनका प्रयोग किस प्रकार किया जाए। इसके बावजूद बहुत से किसान इन निर्देशों पर ध्यान नहीं देते हैं जिसके कारण वह इन दवाइयों का कई बार प्रयोग करता है।
Published on:
14 May 2017 06:24 am
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