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बसंत विहार से सरकारी महकमों ने मुंह मोडा, खतरा मंडराया

पिछले कई दिनों से बरसाती नाले के पानी की समस्या से जूझ रहे बसन्त विहार के लोगों ने इसकी निकासी को लेकर सरकारी महकमों के ढुलमुल रवैए पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि प्रशासन फिर से यहां किसी 'भविष्यÓ के हादसे का शिकार होना का इंतजार कर रहा है।

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Government departments turned their backs on Basant Vihar, danger loom

Government departments turned their backs on Basant Vihar, danger loom


भीलवाड़ा। पिछले कई दिनों से बरसाती नाले के पानी की समस्या से जूझ रहे बसन्त विहार के लोगों ने इसकी निकासी को लेकर सरकारी महकमों के ढुलमुल रवैए पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि प्रशासन फिर से यहां किसी 'भविष्यÓ के हादसे का शिकार होना का इंतजार कर रहा है।

गौरतलब है कि गत १४ जुलाई की शहर के कालेज रोड पर सड़क पर भरे पानी में बहने से पास में स्थित नाले में डूबकर आजाद नगर निवासी तेरह वर्षीय भविष्य लालवानी की मृत्यु हो गई थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि 25 साल पहले यह कॉलोनी नगर विकास न्यास ने विकसित कर भूखण्ड लोगों को बेचे थे। तब से बरसात का पानी मेवाड़ मिल के अंदर से प्राकृतिक नाले से होकर पांडू के नाले में मिलता था, लेकिन दो साल पहले यहा एमटीएम डवलपर्स ने कॉलोनी विकसित की तो इस प्राकृतिक नाले को बंद कर दिया। इससे बरसात का सारा पानी कॉलोनी के ए और एफ सेक्टर में भर रहा है। एमटीएम की जमीन का भू रूपान्तरण नगर विकास न्यास ने किया है।

बसन्त विहार कॉलोनी भी न्यास ने विकसित की है तो न्यास को इस समस्या का समाधान करना चाहिए। बरसात का पानी की निकासी का उपाय करना चाहिए। बच्चों के साथ हादसे का डर लोगों का कहना है कि यहां बरसात होते ही कॉलोनी के आधे हिस्से का पानी मेवाड़ मिल की दीवार की तरफ आकर सड़क पर कई फीट तक भर जाता है। ऐसे में यहां आसपास के घरों से लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है। पानी के अंदर से निकलते समय बच्चों के साथ हादसा होने का डर रहता है। उन्हें डर है कि पिछले दिनों कालेज मार्ग पर किशोर के साथ हुआ हादसा यहां किसी अन्य बच्चे के साथ न हो जाएं।

प्रशासन जिम्मेदारी समझे
स्थानीय लोगों का कहना है कि दो साल पहले जब यहां पानी भरा था, तब नगर परिषद की तत्कालीन सभापति ने जेसीबी से दीवार तुड़वाकर पानी की निकासी करवाई थी। प्रशासन और सम्बंधित महकमों को जनता के हितों का ध्यान रखते हुए पानी की समुचित निकासी की कार्रवाई करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी प्राकृतिक नालों के बहाव क्षेत्र में आ रहे अवरोधों को हटाने के निर्देश दे रखे है। ऐसे में प्रशासन को आपदा प्रबंधन के तहत यहां कार्रवाई करनी चाहिए।