मानसून की विदाई के बाद सरकार की अब नींद खुली है। सरकार के फरमान के बाद वन विभाग की ओर से गांधी जयंती पर दो अक्टूबर से वन महोत्सव मनाने की तैयारी की जा रही है, जबकि पौधों की वृद्धि करने में अमृत माने जाने वाला वर्षाकाल समाप्त हो गया है। बरसात के समय वन महोत्सव का आयोजन नहीं कर, इसकी तिथि आगे खिसका देने से अफसरों की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। पर्यावरण के जागरूकों का मानना है कि बरसात ही चली गई, अब वन महोत्सव मनाने का क्या औचित्य रहेगा।