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सरकार करेगी भीलवाड़ा में टेक्सटाइल व संतरे को प्रमोट

पंच-गौरव में संतरा, अर्जुन, टेक्सटाइल, मांडलगढ़ किला व बास्केटबाल को किया शामिल

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Government will promote textile and oranges in Bhilwara

Government will promote textile and oranges in Bhilwara

भीलवाड़ा जिले में एक फसल, एक वनस्पति प्रजाति, एक उत्पाद, एक पर्यटन स्थल, और एक खेल पर राजस्थान सरकार विशेष ध्यान देगी। इन पांच तत्वों को भीलवाड़ा जिले का पंच-गौरव माना है। इसका मकसद जिले के समग्र विकास को बढ़ावा देना है। उद्योग, प्रजाति, कृषि, पर्यटन और खेल विभाग नोडल विभाग के तौर पर काम करेंगे। इनका काम, एक जिले में एक उत्पाद को बढ़ावा देना होगा।

एक उत्पाद- टेक्सटाइल

भीलवाड़ा की पहचान विश्व में टेक्सटाइल सिटी के रूप में है। भीलवाड़ा में टेक्सटाइल की शुरुआत 1938 से हुई। सबसे पहले यहां मेवाड़ मिल की स्थापना हुई। उसके बाद 1962 में लक्ष्मीनिवास झुनझुनवाला ने राजस्थान स्पिनिंग और बुनाई की मिल की स्थापना की थी। वर्तमान में 20 से अधिक स्पिनिंग मिल, 400 से अधिक विविंग उद्योग, 25 से अधिक प्रोसेस हाउस, 150 टीएफओ उद्योग संचालित हैं। प्रतिवर्ष 120 करोड़ मीटर कपड़ा तैयार होता है। इसमें डेनिम भी शामिल है। सालाना टर्नओवर 30 हजार करोड़ रुपए है। वर्तमान में प्लास्टिक की खाली वेस्ट बोतलों से भी धागा व कपड़ा बनाया जा रहा है।

एक खेल- बास्केटबॉल

बास्केटबाल में भीलवाड़ा ने अपनी धाक जमाई है। भीलवाड़ा के सुरेन्द्र कटारिया को 1973 में बास्केटबाल में अर्जुन अवार्ड का खिताब मिला। बास्केटबाल की दुनिया में भारत के बेहतरीन खिलाड़ी और शूटर की खोज की जाए तो महज एक नाम सामने आता है वह हैं सुरेंद्र कुमार कटारिया। बास्केटबाल में बेहतरीन प्रदर्शन के साथ कोच के रूप में सेवाएं देने पर उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। देश के लिए कई पदक जीते और उनका जैसा तेज शूटर देश में आज तक नहीं हुआ। राष्ट्रीय टूर्नामेंट में सुरेंद्र कुमार भारतीय रेलवे का प्रतिनिधित्व करते थे और कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया था। भीलवाड़ा में बास्केटबाल के राज्य व अन्तराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता तक होती है।

एक उपज- संतरा

छोटे नागपुर के रूप में विख्यात मांडलगढ़ व बीगोद क्षेत्र के बगीचों में संतरों का उत्पादन हो रहा है। संतरों की पैकिंग कर जयपुर दिल्ली सहित देश भर के कई शहरों में जाते हैं। यहां के संतरों की मिठास नागपुर के संतरों की तरह होने से लोग काफी पसंद करते हैं। मांडलगढ़ क्षेत्र में 500 हैक्टेयर में संतरे के बगीचे है। बगीचों से सर्दी ओर गर्मी में फल लिया जाता है। अभी बगीचों में सर्दी का फल तैयार हो रहा है।

एक पर्यटन- मांडलगढ़ किला

भीलवाड़ा से 54 किलोमीटर दूर है। यह जगह ऐतिहासिक महत्व की है। मांडलगढ किले में मंदिर है। मध्यकाल के दौरान कई युद्धों का साक्षी रहा है। प्रसिद्ध हल्दीघाटी युद्ध के दौरान मुगल सेना ने इस जगह डेरा जमाया था। आधा मील लंबे किले की पहाड़ी के शिखर पर प्रचीरों और खाई की सुरक्षा के साथ अडिग है। यहां का किला बालनोट के राजपूतों के एक प्रमुख ने बनवाया था। प्राचीन मांडलगढ़ दुर्ग अब जर्जर हो चुका हैं, लेकिन गौरवशाली अतीत की यादें इसके आगोश में सिमटी हैं।

एक प्रजाति- अर्जुन का पेड़

भीलवाड़ा जिले में अर्जुन के पेड़ बड़ी संख्या में लगे हुए हैं। हरणी की पहाडि़यों पर सैकड़ों पेड़ देखने को मिल जाएंगे। अर्जुन के पेड़ का भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद में बहुत बड़ा महत्व है। यह न केवल एक औषधीय पौधा है, बल्कि इसका धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व भी है। अर्जुन के पेड़ की छाल, पत्ते और फल विभिन्न रोगों के इलाज में उपयोग किए जाते हैं, विशेष रूप से हृदय रोगों के लिए। अर्जुन में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। अर्जुन की चाय, काढा या पाउडर तक काम में लिया जाता है।