
सोशल मीडिया पर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ग्रुप, बच्चों की मजाक से मचा हड़कम्प
माण्डलगढ़।
आतंकी संगठन के नाम से सोशल मीडिया पर ग्रुप बना माण्डलगढ़ क्षेत्र में रहने वाले कुछ बच्चों की मजाक ने रविवार को पुलिस की नींद उड़ा दी। ग्रुप बनाने के बाद बच्चों ने उसकी फ्रेंड रिक्वेस्ट तक भेज दी। पता चलने पर हड़कम्प मच गया। पुलिस व इंटेलिजेंस अधिकारियों ने ग्रुप बनाने वाले बच्चों से पूछताछ की। हालांकि मामला नादानी का निकला। पुलिस ने किसी भी आतंक संगठन से इनका तार जुड़े होने से इनकार कर दिया है। न ही किसी ने इनको ग्रुप प्रत्सोहित किया।
पुलिस अधीक्षक प्रदीपमोहन शर्मा ने बताया कि माण्डलगढ़ क्षेत्र में रहने वाले कुछ बच्चों ने चार-पांच दिनों पूर्व सोशल मीडिया पर गु्रप बनाया। उसका नाम लश्कर-ए-तैयबा रख दिया। इसकी फ्रेंड रिक्वेस्ट उत्तरप्रदेश के लखनऊ के एक व्यक्ति को भेज दी। लखनऊ के हजरत स्थित साइबर क्राइम तक शिकायत पहुंची। साइबर सेल ने जांच की तो यह नम्बर माण्डलगढ़ क्षेत्र के नाबालिग का निकला। वहां पुलिस ने छानबीन की तो सामने आया कि जिस नम्बर से रिक्वेस्ट भेजी गई, उस किशोर के सहपाठी छात्रों ने गु्रप बनाया। उसमें कुछ संवेदनशील सामग्री तक डाल दी।
उठा मामला तो तलाशा बच्चों को, अधिकारियों का डेरा
आतंकी संगठन के नाम से गु्रप बनाने का भीलवाड़ा पुलिस को रविवार दोपहर पता चला। पता चलते ही हड़कम्प मच गया। माण्डलगढ़ थानाप्रभारी गजेन्द्रसिंह बच्चों को तलाश में लग गए। जिस नम्बर से ग्रुप बनाया गया। किशोर भीलवाड़ा में था। उसे परिजनों के साथ थाना लाया गया। यहां पर माण्डलगढ़ पुलिस उपाधीक्षक राजेन्द्र नैन व आईबी अधिकारी भी पहुंच गए। किशोर के साथियों को भी बुलाया गया। परिजनों के सामने उनसे करीब चार-पांच घण्टे पूछताछ हुई। उनकी बताई बातों का गोपनीय रूप से पता भी लगाया गया। हालांकि बाद नादानी ही सामने आई। एसपी शर्मा का कहना था कि आतंकी संगठन से कोई सम्बंध सामने नहीं आया है। अगर एेसा हो यूपी पुलिस मुकदमा दर्ज करती और माण्डलगढ़ आकर पूछताछ करती।
कैसे उपजी यह खुराफात
बच्चों की कारस्तानी मजाक थी। लेकिन सवाल यह उठता है कि यह दिमाग में आया कैसे? उनको किसी ने गु्रप बनाने के लिए प्रोत्साहित तो नहीं किया। इस बारे में पुलिस गहनता से पड़ताल कर रही है। वहीं लखनऊ पुलिस को पता चल गया। वहां की पुलिस ने भीलवाड़ा पुलिस को सूचना तक देना मुनासिब नहीं समझा। वहीं माण्डलगढ़ पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठे है। इतने संवेदनशील मामले का स्थानीय पुलिास को पता तक नहीं लगा। जबकि माण्डलगढ़ संवेदनशील इलाको में गिना जाता है।
Published on:
25 Feb 2018 10:06 pm
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