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रामजी के दरबार में आने के लिए लेनी पड़ेगी हनुमानजी की शरण

भीलवाड़ा. भगवान बिना बताए ही आ जाते हैं इसलिए नित्य तैयारी रखो। ना जाने किस रूप में नारायण मिल जाए। जिस देश, वेश एवं परिवेश में रहो, भगवान का स्मरण करते रहो। किसी का प्रिय बनने के लिए ढलना एवं गलना पड़ता है।

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रामजी के दरबार में आने के लिए लेनी पड़ेगी हनुमानजी की शरण

रामजी के दरबार में आने के लिए लेनी पड़ेगी हनुमानजी की शरण

भीलवाड़ा. भगवान बिना बताए ही आ जाते हैं इसलिए नित्य तैयारी रखो। ना जाने किस रूप में नारायण मिल जाए। जिस देश, वेश एवं परिवेश में रहो, भगवान का स्मरण करते रहो। किसी का प्रिय बनने के लिए ढलना एवं गलना पड़ता है। दूर रहकर भी प्रियता प्राप्त की जा सकती है। रामजी के दरबार में प्रवेश करने के लिए हनुमानजी की शरण तो लेनी ही पड़ेगी। ये विचार कथावाचक प्रेमभूषण ने शनिवार को श्रीसंकट मोचन हनुमान मंदिर की ओर से श्री रामकथा सेवा समिति के तत्वावधान में चित्रकूटधाम में श्रीरामकथा महोत्सव के पांचवे दिन जताए। भगवान के धनुष भंग एवं सीता-रामजी के विवाह प्रसंग की चर्चा हुई। प्रेमभूषण ने कहा कि आपके ह्दय में क्या है ये भगवान को बताने की जरूरत नहींहै। वह तो सबके ह्दय में वास करते हैं। मां भगवती और भगवान सब जानते है कि किसके मन में क्या है। भोजन प्रसाद बन जाए तो समझ लेना लक्ष्य की पूर्ति हो गई।
छप्पन भोग की झांकी

प्रेमभूषण महाराज ने भगवान राम-जानकी के विवाह प्रसंग का वाचन किया तो पूरा माहौल जय सियाराम के जयकारों से गूंज उठा। भक्तगण झूमने लगे। भगवान राम एवं सीताजी के विवाह का उत्सव मनाने के लिए मंच पर छप्पन भोग की झांकी भी सजाई गई। बधाइयां गूंजने लगी और सीतारामजी के जय हर तरफ होने लगी। कई श्रद्धालु राम-जानकी विवाह की खुशियां मनाने के लिए नृत्य करने लगे। आयोजन समिति की मंजू पोखरना ने बताया कि छप्पन भोग एवं राम विवाह उत्सव में नवरतनदेवी बजाज, नैना स्वर्णकार, मोना डाड, पूजा कंदोई, मोनिका बजाज, पूजा बजाज, प्रिया बांगड़ आदि का पूर्ण सहयोग रहा।
ब्रह्म वेला में उठे

कथावाचक ने कहा कि मनुष्य की समस्या है कि वे वहीं समझता है जो उसे समझना है। कायदे की नहीं, फायदे की बात समझता है। जो कायदे की बात समझ जाएगा, वह फायदे में रहेगा। जो ब्रह्म वेला में उठ नहीं सकता उसे ब्रह्म (भगवान) के दर्शन हो नहीं सकते। इसलिए सुबह जल्दी उठो और उठाओ।