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भीलवाड़ा का हरणी महादेव मंदिर, जिसे कभी गुप्तेश्वर महादेव से भी जानते थे

- सावन मास में एक माह तक होगी पूजा-अर्चना

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Harni Mahadev Temple of Bhilwara, which was once also known as Gupteshwar Mahadev

Harni Mahadev Temple of Bhilwara, which was once also known as Gupteshwar Mahadev

भीलवाड़ा शहर का हरणी महादेव मंदिर एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है जो भीलवाड़ा शहर से छह किमी दूर है। हरणी महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित मंदिर है। यह मंदिर पहाड़ी पर स्थित है जो ऊपर से पूरे शहर का विहंगम दृश्य प्रस्तुत करता है। सावन के दौरान बड़ी संख्या में भक्त यहां आते हैं और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम करते हैं। इस मंदिर में एक शिवलिंग स्थित है जिसका अपना धार्मिक महत्व है। मंदिर का नाम हरणी के नाम पर पड़ा। मंदिर वास्तुकला की सच्ची राजस्थानी शैली का एक शानदार उदाहरण है।

हरणी में कभी जंगल हुआ करता था

हरणी महादेव मंदिर कभी गुप्तेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता था। यहां कभी जंगल हुआ करता था। राजा-महाराजा इस वन में शिकार के लिए आते थे। एक बार राजा को मिट्टी टीले दिखे। इन्हें खोदा तो शिव, पार्वती व गणेश की मूर्तियां दिखाई दी। राजा उन्हें ले जाने लगा, लेकिन सफल नहीं हुए। बाद में भीलवाड़ा के दरक परिवार के सोकरण, रामकरण, पन्ना लाल व छगन लाल ने गुफा में स्थित भगवान की पूजा-अर्चना का दायित्व हरणी गांव के ब्राह्मणों को दिया। हरणी गांव के पास होने से इसका नाम हरणी महादेव हो गया। मंदिर के देख-रेख आज भी दरक परिवार करता है।

मंदिर का धार्मिक महत्व

हरणी महादेव मंदिर का अपना एक अलग धार्मिक महत्व है। यहां हर साल शिवरात्रि पर तीन दिवसीय मेला भरता है। सावन माह में भक्त विभिन्न धार्मिक संस्कार करते हैं। पहाड़ी की चोटी पर ‘चामुंडामाता’ का मंदिर स्थित है जहां से शहर का पूरा दृश्य देखा जा सकता है। मंदिर सड़क से जुड़ा हुआ है। हरणी महादेव में शिवलिंग के साथ एक पीतल का नंदी (शिव का वाहन) भी है। शिव का वाहन नंदी को माना जाता है।