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ईमानदारी सबसे बड़ी सम्पत्ति-आचार्य महाश्रमण

हाईकोर्ट न्यायाधीश मनोज गर्ग ने लिया आशीर्वाद

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ईमानदारी सबसे बड़ी सम्पत्ति-आचार्य महाश्रमण

ईमानदारी सबसे बड़ी सम्पत्ति-आचार्य महाश्रमण

भीलवाड़ा।
आचार्य महाश्रमण ने कहा कि दो शब्द हैं वित्त और वृत्त। वित्त का अर्थ धन और पैसा है तो वृत्त का अर्थ चरित्र, व्यवहार। साधुओं के पांच नियमों में अंतिम नियम सर्व परिग्रह त्याग का नियम होता है। गृहस्थ जीवन में वित्त का महत्व होता है। गृहस्थ को अर्थ आदि की व्यवस्थाओं पर भी ध्यान देना होता है। आदमी को अर्थ के उपार्जन में शुचिता बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को आर्थिक शुचिता को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। प्रयास करना चाहिए उसके घर आने वाला अर्थ धर्म, न्याय और नीति से युक्त हो। अन्याय, अनैतिकता और अधर्म से कमाया गया धन घर में न आए। आदमी के व्यापार में ईमानदारी रहे और अर्थ के प्रति अनासक्ति की भावना रहे तो आर्थिक शुचिता बनी रह सकती है। आदमी के जीवन की सबसे बड़ी सम्पत्ति ईमानदारी है। गृहस्थ अपने जीवन में ईमानदारी रखने का प्रयास करे तो कल्याण हो सकता है।
रविवार को आचार्य के प्रवचन में मेवाड़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स से जुड़े पदाधिकारी व राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश मनोज कुमार गर्ग पहुंचे। मेवाड़ चेम्बर के महासचिव आर के जैन, राजस्थान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएन मोदानी व आचार्य महाश्रमण चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष प्रकाश सुतरिया ने विचार जताए। अभिनव चोरडिय़ा ने गीत पेश किया। साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा ने श्रद्धालुओं को तीन प्रकार के चक्षुओं का वर्णन किया।
तेरापंथ महिला मंडल की क्यूप्रेशर कार्यशाला में डॉ हेम चन्द्र सुदेंचा ने एक्यूप्रेशर, मुद्रा विज्ञान, प्राणायाम, कलर थेरपी के माध्यम से रोगों का इलाज बताया। मंडल अध्यक्ष मीना बाबेल ने स्वागत किया। आभार मंत्री रेणु चोरडिय़ा ने किया। प्रेक्षा मेहता ने संचालन किया।