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रंगे-पुते नजर आने लगे घर

दिवाली की तैयारी तेज

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Houses started showing up in bhilwara

Houses started showing up in bhilwara

सुरेश जैन
भीलवाड़ा
दिवाली आने में अभी एक पखवाड़े से अधिक बचा है लेकिन गांवों की गलियों से शहर की कॉलोनियों में नए कलेवर में रंगे-पुते घरों से त्योहारी रंगत दिखाई देने लगी है।
नवरात्र में शुरू रंगाई-पुताई का काम इन दिनों चरम पर है। रंग-पेंट की दुकानों पर ग्राहकी एक सप्ताह में दुगनी हो गई है। लोग पेंटर के साथ रंंग पसंद कर खरीदारी को दुकानों पर पहुंच रहे हैं। बारिश में बदरंग मकान रंगाई-पुताई के बाद सजे-संवरे दिख रहे हैं। नए मकान की दीवारों के लिए प्राइमर व पुट्टी का उपयोग कर रहे हैं, ताकि रंग की खपत कम हो सके। कलर के कॉम्बिनेशन व मेटेलिक कलर पसंद कर रहे हैं। एक बार खर्च करने पर पांच साल तक देखने की जरूरत नहीं है। बाजार में कई कंपनियों के अन्य रंग बिक रहे हैं।
ब्रश के बाद रोलर से पुताई
कू ची और बु्रश के दौर को पीछे छोड़ रोलर और स्प्रे से पुताई का चलन आ गया है। पेंटरों का कहना है कि ब्रश की तुलना में रोलर की पुताई में एकरूपता से दीवारों में अच्छी चमक आती है। एक ही कमरे में चौथी दीवार व छत पर अलग रंग कराने का चलन भी जोरों पर है।
कम्प्यूटरीकृत मशीन से बनते हैं कलर
रंग-पेंट बाजार हाईटेक है। पहले कंपनियां रंगों के दो दर्जन शेड्स बेचती थीं। अब विक्रेताओं के यहां कम्प्यूटराइज्ड कलर मिक्सर मशीन है। यह 16 आधार रंगों से करीब पांच हजार शेड्स तैयार करती है। मशीन खुद चाहे शेड के कोड से डिस्टेम्पर व इम्लशन में निर्धारित मात्रा में कलर घोलती है। कली और चूने की पुताई के दौर के बाद चलन में आया डिस्टेम्पर अब इम्लशन के आगे फीका पड़ गया है। कम खर्च में अधिक चमक और ज्यादा एरिया कवरेज की वजह से इम्लशन रंग लोगों की खासे पसंद आ रहें हैं।
कली के साथ विदा कूची
एक जमाने में लोग कली-चूने से घरों की पुताई में मूंज की कूची का उपयोग करते थे। समय के बदलाव के साथ कम वजन वाले प्लास्टिक के ब्रश बाजार में आने से वजन दार कूची चलन से बाहर हो गई है। स्थिति यह है कि चूने की पुताई में भी पेंटर अब ब्रशों का ही उपयोग करते हैं। बाजार में कली-चूने की खपत भी नाममात्र की रह गई है।
नहीं मिल रहे पुताई करने वाले
दीपावली के बाद शादी विवाहों का सीजन शुरु होने वाला है। ऐसे में लोग रंगाई-पुताई कर रहे हैं। यही वजह है कि शहर में पुताई करने वालों का टोटा पड़ गया है। त्योहार को देखते पुताई कराना लोगों को भारी पड़ रहा है। इतनी राशि का कलर आ रहा है। उससे दोगुनी राशि मजदूरी पर खर्च हो रही है। वर्तमान में एक कारीगर 600 से 800 रुपए प्रतिदिन मजदूरी मांग रहा है। पेन्ट्स व्यापारी का कहना है कि कोरोना के बाद दीपावली पर रंग-पेंट के बाजार में रंगत दिखाई दे रही है। लोग अपने घर और प्रतिष्ठानों की रंगाई-पुताई पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।