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लॉकडाउन के बाद आखिर कैसे लग रही जिंदगी दाव पर

कोरोना महामारी के बाद लॉकडाउन में चौपट हुए धंधे से अवसाद में आए लोग जिंदगी को ही दाव पर लगा रहे है। किसी को कर्ज चुकाने की चिंता तो किसी को व्यापार में मंदी की मार। शहर में एक सप्ताह के भीतर दो व्यापारियों ने मौत को गले लगा लिया। इससे पुलिस और चिकित्सक भी हैरान है। जिले में एक माह के भीतर आत्महत्या के मामलों में इजाफा हो हुआ है।
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भीलवाड़ा

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Akash Mathur

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Updated: 22 Jun 2020, 11:56 AM IST

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भीलवाड़ा. कोरोना महामारी के बाद लॉकडाउन में चौपट हुए धंधे से अवसाद में आए लोग जिंदगी को ही दाव पर लगा रहे है। किसी को कर्ज चुकाने की चिंता तो किसी को व्यापार में मंदी की मार। शहर में एक सप्ताह के भीतर दो व्यापारियों ने मौत को गले लगा लिया। इससे पुलिस और चिकित्सक भी हैरान है। जिले में एक माह के भीतर आत्महत्या के मामलों में इजाफा हो हुआ है। हैरान कर देने वाली बात यह है कि आत्महत्या के पीछे अवसाद का सर्वाधिक बड़ा कारण आर्थिक हालत रहे है।

इसलिए लगा रहे मौत को गले
व्यक्ति दूरगामी परिणाम नहीं सोचता। परिवार की तरफ ध्यान नहीं देता। क्षणभर का तनाव मन में आते ही मौत को गले लगा लेता है। आत्महत्या के सामने मामलों में कुछ इसी तरह की स्थिति सामने आई है। पुलिस और मनोचिकित्सक ने मौत को गले लगाने के बाद अस्पताल में भर्ती हुए लोगों से बातचीत की तो साफ सामने आया कि उन्होंने परेशानी को लेकर किसी को नहीं बताया।


एेसे दूर किया जा सकता तनाव
- परिवार और दोस्तों के साथ तनाव को शेयर करे
ं- उनके समाधान के रास्ते खोजे, दूरगामी परिणाम देखें
- नकारात्मक सोच मन में कभी नहीं आने दें
- जितना हो मोबाइल से दूर रहें, यह समय परिवार को दें
- योगा करें और सुबह की सैर पर जाए
- कोई भी तुरंत निर्णय नहीं ले। सोच-विचार करें।

अपने आप से विश्वास नहीं खोए, अंधेरा है तो सुबह भी होगी

अपने आप से विश्वास नहीं खोए। अंधेरा है तो मानिए सुबह भी होगी। लॉकडाउन के बाद परिस्थितियां विपरीत है, लेकिन बदलेंगी जरूर। कोई तनाव है तो अपने दोस्तों और परिवार के लोगों से शेयर करें। निश्चित शेयर करने पर सामने वाले से समाधान निकल कर आएगा। परिवार में आपकी भी महत्ती जरूरत है। इसे समझना होगा। नकारात्मक सोच कभी मन में नहीं आने दें। दुख बांटने से रास्ता निकलता है।

- वीरभान चंचलानी, मनोचिकित्सक, महात्मा गांधी चिकित्सालय