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बिस्तर नहीं मिला तो स्ट्रेचर को बनाया बेड

भीलवाड़ा . एमजीएच पर मरीजों का भार लगातार बढ़ रहा है। आउटडोर से लेकर इंडोर तक क्षमता से अधिक मरीज नजर आ रहे हैं। वार्डों में बिस्तर की कमी है।

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बिस्तर नहीं मिला तो स्ट्रेचर को बनाया बेड

बिस्तर नहीं मिला तो स्ट्रेचर को बनाया बेड

भीलवाड़ा . एमजीएच पर मरीजों का भार लगातार बढ़ रहा है। आउटडोर से लेकर इंडोर तक क्षमता से अधिक मरीज नजर आ रहे हैं। वार्डों में बिस्तर की कमी है। बच्चों के वार्ड में एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है। ऐसे मरीज भी हैं, जिन्हें बिस्तर के लिए इंतजार करना पड़ रहा है या स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। गुरुवार को रामनवमी के अवकाश के चलते एमजी अस्पताल में दोपहर दो बजे तक डॉक्टरों ने मरीज देखे। आपातकालीन सेवा में दो अतिरिक्त चिकित्सक लगाए गए।

इधर, निजी चिकित्सकों की हड़ताल से परेशान मरीज दूसरे राज्यों का रुख करने लगे हैं। हृदय, मधुमेह, फेफड़े आदि की बीमारी से ग्रस्त कई मरीज परेशान होकर अन्य राज्यों में जाने लगे हैं। आरजीएचएस से जुड़े वरिष्ठ नागरिक भी परेशान हैं। अपनी दवा समाप्त होने के बाद पुन: डॉक्टरों को दिखाना चाह रहे वरिष्ठजन भी परेशान हैं। वहीं एमजीएच के अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ ने बताया कि आपातकाल में आने वाले सभी मरीजों का उपचार किया जा रहा है। भर्ती मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।