
गारनेट मिश्रित बजरी इतनी उपयोगी है कि इससे कुछ लोग महंगा मिनरल गारनेट निकाल रहे हैं
भीलवाड़ा।
बजरी का उपयोग निर्माण कार्यों में ही आता देखा होगा, लेकिन जिले की बजरी व मिट्टी अब सोना उगल रही है। मतलब जिले में गारनेट मिश्रित बजरी इतनी उपयोगी है कि इससे कुछ लोग महंगा मिनरल गारनेट निकाल रहे हैं। जिले में गारनेट की लीजें बहुत कम है, लेकिन इसके बावजूद भी इसका अवैध कारोबार बढ़ रहा है। कोटड़ी, बीगोद क्षेत्र में नदी-नालों के पास कुछ लोगों ने अनाधिकृत रूप से गोदाम बना रखे हैं। इनमें बजरी व मिट्टी से गारनेट निकालकर इसे एक्सपोर्ट करने का काम किया जा रहा है। अवैध कारोबार इस कदर बढ़ा है कि खनिज विभाग ने वर्ष 2017-18 में 80 केस बनाकर एक करोड़ 77 लाख 88 हजार रुपए की पैनल्टी वसूल की है।
इसमें भीलवाड़ा खनि अभियंता कार्यालय ने 33 केस बनाकर एक करोड़ 02 लाख रुपए तथा विजिलेंस टीम ने 47 केस बनाकर 75 लाख 85 हजार रुपए का जुर्माना वसूल किया है। हाल ही में कोटड़ी क्षेत्र में एक जगह छापामार कर 80 टन गारनेट पकड़ा गया है।
रॉयल्टी से इनता मिलता है जुर्माना
खनिज विभाग ने वर्ष 2017-18 में गारनेट से मात्र 04 लाख 45 हजार रुपए की रॉयल्टी राशि जमा की है। अवैध खनन पर की गई कार्रवाई में एक करोड़ 77 लाख 88 हजार रुपए वसूले गए हैं। मतलब यह है कि गारनेट का कारोबार करने वाले लोग रॉयल्टी जमा नहीं कराकर अवैध कारोबार कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, जिनकी लीज है उनमें कई में माल निकलना बंद हो गया फिर भी उनके रवन्ना से यह कारोबार हो रहा है।
क्या काम आता है गारनेट
गारनेट कि विदेशों में खूब मांग है। पहले तमिलनाडु से ही निर्यात होता था, लेकिन अब राजस्थान से खूब निर्यात हो रहा है। गुणवत्ता के हिसाब से इसका उपयोग होता है। इससे रेजमाल भी बनता है। साथ ही क्रॉकरी में भी काम आता है। अच्छी गुणवत्ता का होने पर नगीने के रूप में भी उपयोग होता है। इस कारण इसकी मांग ज्यादा है।
इसलिए बढ़ा बजरी का अवैध खनन
अवैध बजरी खनन इसलिए भी बढ़़ा है क्योंकि इससे गारनेट निकल रहा है। कोटड़ी व बीगोद क्षेत्र में गारनेट मिश्रित बजरी निकल रही है। चोरी छिपे डम्परों व ट्रक से बजरी ला कर मशीनों से छान कर गारनेट निकाला जा रहा है। बजरी से गारनेट निकालने के बाद बेखौफ होकर खुले में सुखाया जा रहा है। गारनेट महंगा होने के कारण भी इसे बजरी में सोना कहा जाता है। गारनेट को क्वालिटी के हिसाब से 8 से 10 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से व्यापारी खरीदते हैं। गारनेट में अच्छी कमाई होने से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ता जा रहा है। गारनेट को खरीदने के लिए बाहरी व्यापारी भी आ रहे हैं। अभी तीन हजार रुपए से लेकर चार हजार रुपए प्रतिटन के हिसाब से गारनेट बिक रहा है।
हां, अवैध कारोबार की शिकायतें मिली है
गारनेट के अवैध कारोबार की शिकायतें मिली थी। हमने वित्तीय वर्ष 2017-18 में 80 केस बनाकर एक करोड़ 77 लाख 88 हजार रुपए की पैनल्टी वसूल की है। अभी दो दिन पहले ही बड़ी कार्रवाई की है। इसमें कई वाहन भी जब्त किए हैं।
कमलेश्वर बारेगामा, खनि अभियंता
Published on:
07 Apr 2018 12:33 pm
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