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पुरुषोत्तम मास में मानव को मिलती है सत्कर्म करने की प्रेरणा

हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में चल रहे पुरुषोत्तम कथा

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In Purushottam month, human gets inspiration to do work in bhilwara

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भीलवाड़ा .
हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में चल रहे पुरुषोत्तम कथा में ग्यारहवें दिन योगेश्वरानंद ने श्री कृष्ण पुरुषोत्तम संवाद का उल्लेख करते हुए बताया कि जो व्यक्ति दूसरों का उपकार करता है उसे सतकीर्ति की प्राप्ति होती है। भगवान पुरुषोत्तम ने अपनी शरण में आए हुए मलमास को यह वरदान दिया कि जैसे मैं गुणों में सर्वश्रेष्ठ हूं, कीर्ति में अग्रगामी हूं, अनुभव संपन्न हूं, समस्त ऐश्वर्य, धर्म कीर्ति, लक्ष्मी, ज्ञान और वैराग्य से संपन्न हूं, उसी प्रकार इस मलमास का भक्त भी प्रसिद्ध होकर इन गुणों से संपन्न होगा। पुरुषोत्तम मास के आगमन पर जो लोग मेरी आराधना, भजन, पूजन आदि अन्यान्य धर्म कार्य करेंगे उन्हें अनंत पुण्य की प्राप्ति होगी। इस प्रकार भगवान ने पुरुषोत्तम मास में सब प्रकार के धार्मिक कार्यों के अनुष्ठान का अधिकार देते हुए मानव मात्र को इस महीने में सत्कर्म करने की प्रेरणा दी। कथा में ईश्वर मनोहर उदासीन आश्रम अजमेर के महंत स्वरूप दास, शांतानंद उदासीन आश्रम पुष्कर के हनुमान राम, बालक धाम किशनगढ़ के श्यामदास शामिल हुए। संत मयाराम ने बताया कि प्रतिदिन सुबह मंडल पूजा, अभिषेक, हवन यज्ञ, विभिन्न स्त्रोतों का पाठ, भागवत मूल पाठ पारायण हो रहे हैं।
श्रीमद् भागवत कथा के प्रसंगों में भगवान पृथु अवतार की चर्चा करते हुए कथा प्रवक्ता ने यह प्रतिपादित किया कि महाराज पृथु और उनकी पत्नी अर्ची नारायण और लक्ष्मी के अवतार थे। महाराज पृथु ने अपने जीवन में झूठी प्रशंसा और चापलूसी को कभी प्रश्रय नहीं दिया। उनके अनुसार संभावना मात्र से अपनी स्तुति कराना उचित नहीं है। भगवान से वरदान मांगते हुए महाराज पृथु ने अपनी प्रजा के कल्याण के लिए तथा अपने हित के लिए भगवत कथा श्रवण को श्रेष्ठ साधन मानते हुए भगवान से दस हजार कान मांगे। इसका यह तात्पर्य है कि लोक कल्याण के निमित्त भगवत कथा अनुष्ठान का वह सामथ्र्य पर परमात्मा से प्राप्त होवे जिससे अनेक हजार भगवत प्रेमियों को भगवान की कथा सुनने का अवसर सुलभ कराया जा सके। महाराज पृथु ने ग्राम, नगर आदि की व्यवस्था कराकर अपनी प्रजा को समुचित आवास व्यवस्था देकर सब में सत्य और ईमानदारी पूर्वक जीवन जीने की प्रेरणा दी। आरती में नामदेव समाज सेवा संस्थान (टांक क्षत्रिय) अध्यक्ष शिव प्रसाद बूलिया, कोषाध्यक्ष दिनेश कुमार पीला, उपाध्यक्ष गोविन्द डिडवानिया, ओम प्रकाश हरगण, किशनगोपाल छापरवाल, सत्यनारायण ठाड़ा, अशोक कुमार तोलम्बिया ने हिस्सा लिया।