8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

एमरजेन्सी क्रेडिट लाइन गारन्टी स्कीम से उद्योगों को नहीं मिला फायदा

स्कीम में सुधार करने व विस्तार करने के लिए चेम्बर ने लिखा पत्र
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भीलवाड़ा

•

image

Suresh Jain

•

Updated: 27 Sep 2020, 1:02 AM IST

Industries did not benefit from the emergency credit line guarantee scheme in bhilwara

Industries did not benefit from the emergency credit line guarantee scheme in bhilwara

भीलवाड़ा .
मेवाड चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री कोरोना से ग्रसित उद्योग एवं व्यापार को पुर्नजीवित करने के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत केन्द्र सरकार की ओर से घोषित एमरजेन्सी क्रेडिट लाइन गारन्टी स्कीम में सुधार करने व विस्तार की मांग की है। इसके लिए चेम्बर ने केन्द्रीय वित्तमंत्री, वित्त सचिव एवं रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया को पत्र लिखा है।
महासचिव आर के जैन ने बताया केन्द्र सरकार ने उद्योग एवं व्यापार के पुर्नजीवन के लिए एमरजेन्सी क्रेडिट लाइन गारन्टी स्कीम की घोषणा की थी। इसके तहत बैंक 200 करोड रुपए तक के टर्नऑवर एवं 50 करोड तक की फंड बेस क्रेडिट लिमिट वाले उद्योग व व्यापार को 20 प्रतिशत अतिरिक्त कार्यशील पूंजी प्रदान कर सकते है। अतिरिक्त कार्यशील पूंजी के लिए इस योजना के लिए केन्द्र सरकार ने बैंकों को 100 प्रतिशत गारंटी दी थी। उनकी मूल पंूजी व ब्याज दोनों की सुरक्षा की गारंटी दी गई थी। केन्द्र सरकार की इस योजना के तहत तीन लाख करोड रुपए के नई कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने की योजना थी।
रिजर्व बैंक की ओर से जारी आंकडों के अनुसार 21 सितम्बर तक इस योजना के तहत अभी तक 1.77 लाख करोड के नई कार्यशील पूंजी स्वीकृत की गई है। इससे भी केवल 1.25 लाख करोड के ऋण जारी किए गए हैं। जबकि योजना में आवेदन की अन्तिम तिथी 31 अक्टूबर है।
चेम्बर ने केन्द्र सरकार व रिजर्व बैंक से आग्रह किया है कि योजना के तहत 250 करोड तक के टर्नऑवर वाले उद्योग व व्यापार तथा 150 करोड तक के फंड बेस क्रेडिट लिमिट वालों को 20 प्रतिशत अतिरिक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार बैंक ऐसे उद्योगों की कार्यशील पूंजी पर 1 मार्च से 31 अगस्त तक के ब्याज को नए ऋण में बदल सकती है। लेकिन टर्मलोन ब्याज को इस योजना में सम्मिलित नही किया गया है। अभी वर्तमान उद्योग एवं व्यापार की स्थिति को देखते हुए इस अवधि के टर्मलोन पर ब्याज को भी नये ऋण में बदलने की मांग की है। साथ ही रिजर्व बैंक ने 6 अगस्त 2020 को निर्देश जारी कर बैंकों को एमएसएमई उद्योगों के ऋण को दी गई शर्तो के अनुसार स्टेण्ड्रड ऋण मानकर रिस्ट्रक्चर करने के निर्देश दिए थे। लेकिन अधिकांश बैंकों ने इस तरह के निर्देश अपनी शाखाओं को जारी ही नही किए। इससे एमएसएमई उद्योगों के ऋणों को रिस्ट्रक्चर करवाने में कइिनाईयों का सामना करना पड रहा है। इसके लिए रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया पुन: निर्देश जारी कर उनका सख्ती से अमल करवावे। एमएसएमई श्रेणी के उद्योगों को विपरित कठिनाईयों का सामना करना पड रहा है एवं उनके लिए विशेष सहायता की जरुरत है। एमएसएमई उद्योगों के लिए आईबीसी 2016 के तहत विशेष प्रावधान केन्द्र सरकार के विचाराधीन है, लेकिन अभी तक इस संबंध में दिशा निर्देश जारी नही किए गए है।