
Innovation in science education by defeating disability...example of teacher Jayant
यदि हौसलों में उड़ान हो और कुछ नया करने की इच्छा शक्ति हो तो कमजोरी भी ताकत बन जाती है। ऐसा कर दिखाया है भीलवाड़ा जिले के बिजौलियां क्षेत्र की राउमावि विक्रमपुरा के द्वितीय श्रेणी शिक्षक जयंत कुमार जैन ने। दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने विज्ञान विषय को छात्रों के लिए रोचक, आसान और आधुनिक बनाया। विद्यालय में सुसज्जित विज्ञान प्रयोगशाला तैयार की। प्रयोगों के माध्यम से बच्चों को विषय समझाने की अनूठी पद्धति अपनाई। प्रयोगशाला इतनी व्यवस्थित है कि कई विज्ञान संकाय वाले विद्यालय भी पीछे रह जाते हैं। पिछले 5 वर्षों से विज्ञान विषय का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहा है।
घर बैठे पढ़ाई : ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की सौगात
यूट्यूब चैनल के जरिए विज्ञान शिक्षण की कक्षाएं तैयार कीं। विद्यालय की वेबसाइट बनाई, जिसमें ब्लॉक के बच्चे और अभिभावक जुड़े रहते हैं। वेबसाइट और वीडियो से निजी विद्यालयों के बच्चे भी लाभान्वित हो रहे हैं। ऑनलाइन माध्यम से कक्षा से बाहर भी विज्ञान शिक्षा की पहुँच बनाई। जयंत जैन का लक्ष्य है कि एआई को शिक्षण में उपयोगी बनाया जाए। वे निरंतर नई तकनीक अपनाकर शिक्षण को आसान और रोचक बनाने में जुटे हैं। बच्चे विज्ञान विषय में रुचि लेकर उसे चुनने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। अभिभावक भी वेबसाइट के जरिए विद्यालय से सीधे संवाद कर पा रहे हैं।
Published on:
05 Sept 2025 11:31 am
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