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जबड़ा, नाक समेत मुहं में 12 फ्रेक्चर का सफल ऑपरेशन

भीलवाड़ा के एमजीएच में हुआ ऑपरेशन

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जबड़ा, नाक समेत मुहं में 12 फ्रेक्चर का सफल ऑपरेशन

जबड़ा, नाक समेत मुहं में 12 फ्रेक्चर का सफल ऑपरेशन

भीलवाड़ा।
महात्मा गांधी चिकित्सालय में मंगलवार को मुंह में हुए १२ फ्रेक्चर का जटिल ऑपरेशन किया गया। सात सदस्यों की टीम को इस ऑपरेशन में पांच घंटे से अधिक समय लगा। महाराष्ट्र से भीलवाड़ा मोटरसाइकिल पर आ रहे एक युवक सड़क दुर्घटना में गंभीर रुप से घायल हो गया था, जिसे भीलवाड़ा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां उपचार के लिए बहुत अधिक राशि मांगे जाने पर युवक महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती हो गया।
दन्त रोग विशेषज्ञ व सहायक प्राचार्य डॉ. राकेश गर्ग ने बताया कि कोटा रोड स्थित सुन्दरन गर निवासी पुष्पेन्द्र सुखवाल उम्र [27] महाराष्ट्र से भीलवाड़ा आते समय मन्दसौर के पास सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। हादसे में उसके मुंह व जबड़े में १२ फ्रेक्चर हो गए थे। निजी अस्पताल में उपचार कराने में असमर्थ होने पर वह एमजीएच में भर्ती हो गया। दर्द से परेशान मरीज को देखने के बाद जबड़े के ऑपरेशन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम का गठन किया गया। इसमें डॉ. राकेश गर्ग के साथ डॉ. प्रशान्त पारीक, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जयराज वैष्णव, डॉ. सुमन विश्नोई, एनेस्थेटिक्स डॉ. राजन नन्दा, डॉ. समीर तथा डॉ. गर्भिता पाटीदार को शामिल किया। करीब पांच घंटे तक ऑपरेशन चला, जो कि पूरी तरह सफल रहा। मरीज के परिवार सफल ऑपरेशन के बाद काफी खुश है। उनका कहना था कि इस तरह की समस्या होने पर पहले मरीज को बड़े शहरों की ओर ले जाना पड़ता था, लेकिन अब एमजीएच के मल्टी स्पेशिलिटी डेन्टल केयर में यह सुविधा उपलब्ध हो गया है। जो कि मरीजों को और बाहर लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
एमजीएच अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ ने बताया कि दुर्घटनाओं में बिगड़े चेहरे को सुंदर बनाने के लिए अब निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एमजीएच में जबड़े, नाक, मुंह के ऑपरेशन की सुविधा मिलने लगी है। अब निर्धन लोगों को निजी अस्पतालों में महंगे दामों में जबड़े के ऑपरेशन से राहत मिलेगी। दुर्घटना में जबड़े के उपरी निचले हिस्से में फै्रक्चर होने पर उसके ऑपरेशन कराने में निजी अस्पतालों में एक से डेढ़ लाख रुपए तक का खर्च आ जाता है। लेकिन एमजीएच अस्पताल में यह सुविधा निशुल्क में उपलब्ध करवाई जाएगी। निजी अस्पतालों में फै्रक्चर के अनुसार खर्च किया जाता है। सामान्य तौर पर एक फै्रक्चर पर 2५ से ३० हजार रुपए का खर्च आता है।