निष्पक्ष और विवेकपूर्ण हो न्याय व्यवस्था- आचार्य महाश्रमण

तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम की ओर से छठी जजेस एवं एडवोकेट कॉन्फ्रेंस

By: Suresh Jain

Updated: 25 Sep 2021, 07:30 PM IST

भीलवाड़ा।
आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में शनिवार को तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम की ओर से छठी जजेस एवं एडवोकेट कॉन्फ्रेंस हुई। न्यायाधीश व वकीलों ने हिस्सा लिया। आचार्य ने बताया कि भारतीय संस्कृति में दान की परंपरा प्राचीन है। इसकी पृष्ठभूमि में कई प्रेरणाएं काम करती है। दस प्रेरणाओं से प्रेरित होकर व्यक्ति दान देता है। अनुकम्पा अर्थात दयाभाव से प्रेरित होकर दान देना। संग्रह-उच्च शिक्षा आदि में सहायतार्थ दान। भयदान-मजबूरी वश किसी के भय से देना, कारुण्यदान- मृत आदमी के उपकरण आदि दान देना, लज्जादान-लज्जा वश जो दिया जाता है। गौरवदान-नाम भावना से दिया जाने वाला दान। अधर्मदान-हिंसा, चोरी आदि में लिप्त व्यक्ति को दिया जाने वाला। धर्मदान संयमी साधु या सुपात्र को दिया जाने वाला। शुद्ध दान-कृतमितिदान उपकार किए जाने वाले को दिया जाने वाला। करिष्यति भविष्य में सहयोग की बुद्धि से दिया जाने वाला दान।
आचार्य ने कहा कि शास्त्रों में दान का व्यापक वर्णन मिलता है। विभिन्न संदर्भों एवं भावनाओं से दान दिया जा सकता है। दान व्यवहारिक, तात्कालिक, निमित्त और उपादान किसी न किसी रूप में फल देने वाला हो सकता है। दान संबंधों को मधुर व मजबूत बनाता है। व्यवहारिक जीवन में किसी को मौके पर, शुभ अवसर पर उपहार देने से संबंधों पर अनुकूल असर पड़ता है। प्रेम, मैत्री की भावना बढ़ाकर दुश्मनी दूर करता है। भौतिक दान के अलावा ज्ञानदान भी महत्वपूर्ण है। ज्ञान दान और लेने वाला दोनो योग्य हो तो महान व्यक्तित्व निखर सकता है।
प्रेरणा पाथेय
कॉन्फ्रेंस में आचार्य ने कहा कि व्यवस्था के लिए संविधान विधान जरूरी है। कानून की सुरक्षा के लिए दंड संहिता की आवश्यकता है। इससे सुधार की प्रेरणा मिलती है। न्यायाधीश एक उच्च आसन पर होता है इसलिए उसका निर्णय भय, दुराग्रह, प्रलोभन और निष्पक्ष हो और साथ ही उसकी प्रतिभा, विवेकशक्ति भी निर्मल रहे तो फैसला सही हो सकता है। न्याय के क्षेत्र में कार्यरत व्यक्ति के जीवन में सादगी, संयम और आध्यात्मिकता का समावेश रहना चाहिए। नवदीक्षित मुनि मोक्ष कुमार ने आठ दिन की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। एडवोकेट राज सिंघवी, हर्ष सुराणा, डॉ. विनीत कोठारी, अनिल लोढ़ा ने विचार व्यक्त किए।

Suresh Jain Reporting
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