इस व्यंगचित्र में एक मार्डन परिवार के छोटे से बच्चे को झूले में रोते हुए दिखाया गया है। जिसे चुप कराने के लिए दाई मोबाइल में कार्टून दिखा रही है। और उस बच्चे की मार्डन मां उसे डांट रही है की ..मांजी, ये बच्चा कार्टून से चुप नही होगा, इसको वेबसीरिज दिखाऔ...। यह आज की आधुनिकता पर करारा व्यंगचित्र है। आज छोटा सा बच्चा भी अपडेट रहना चाहता है। अब ना बचपन है, ना संवेदना, ना समाज, ना सोच, ...सब आधुनिकता की चपेट में है।
ऑन लाईन आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर केजी कदम, द्वितीय मध्यप्रदेश के कार्टूनिस्ट "कप्तान" और तृतीय स्थान पर महाराष्ट्र के व्यंग चित्रकार ओमकार बागवे रहे। कदम को आयोजको की ओर से पचास हजार रुपए का पुरुस्कार और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
चित्रकार कदम देश के सुप्रसिद्ध कार्टूनिस्ट आरके लक्ष्मण को अपना आदर्श मानते है। उनके अनुसार अच्छा व्यंगचित्र वही है जो सोचने पर विवश कर दे। जिसमें हास्य से ज्यादा कटाक्ष हो, किसी को हर्ट के बजाय हार्ट पर असर करे। कदम ने इस जीत का श्रेय अपनी निरन्तर साधना के साथ स्थानीय मिडिया को भी देते है। जिसने समय-समय पर उनके व्यंगचित्र प्रकाशित करते हुए प्रोत्साहित किया है। इससे उनको व्यापक पहचान मिली है।