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धार्मिक क्रियाओं से शक्ति का संग्रहण होता-मुनि आदित्य सागर

दिगम्बर मुनि आदित्य सागर महाराज ने सोमवार को विद्यासागर वाटिका में कहा कि मानव शरीर में असीम शक्ति है।

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धार्मिक क्रियाओं से शक्ति का संग्रहण होता-मुनि आदित्य सागर

धार्मिक क्रियाओं से शक्ति का संग्रहण होता-मुनि आदित्य सागर

दिगम्बर मुनि आदित्य सागर महाराज ने सोमवार को विद्यासागर वाटिका में कहा कि मानव शरीर में असीम शक्ति है। विलासिता के कार्यों में शक्ति का विनाश होता है। वहीं साधना, त्याग, तपस्या, धार्मिक क्रियाओं से शक्ति का ओर अधिक संग्रहण होता है, जो आत्मा को उर्ध्वगति गमन कर मोक्ष तक पहुंचाने में सहायक होती है।

कल्पद्रुम मण्डल विधान का उद्देश्य श्रावक को सांसारिक कार्यों से परमार्थिक कार्यों के लिए शक्ति संग्रहण के लिए ही होता है। मुनि आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट की ओर से आठ दिवसीय कल्पद्रुम महामण्डल विधान के पहले दिन बोल रहे थे।

ट्रस्ट अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि सुबह 7 बजे श्री नाथ सर्किल से झण्डारोहणकर्ता अजित अग्रवाल के यहां से झण्डे को बैंड के साथ मंदिर लाया गया। यहां से मुनि संघ के सानिध्य में चार जिन प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली गई। विधान के चक्रवर्ती नेमीचन्द अभिषेक जैन, सौधर्म इन्द्र चैनसुख ममता शाह, कुबेर सुन्दर स्नेहलता कोठारी, महायज्ञनायक नरेश प्रियंका गंगवाल, यज्ञनायक विपिन मदृला सेठी बग्गियों में सवार होकर चल रहे थे। इनके पीछे अन्य इन्द्र, महामण्डलेश्वर की बग्गियां थी। शिवाजी पार्क, आरसी व्यास के सेक्टर 10 से होकर जुलूस विद्यासागर वाटिका पहुंचा। जहां महिलाओं ने घटकलशों से श्रीजी की अगवानी की। सोहनलाल मांगीलाल ने मोलीबंध खोलकर मण्डप का उद्घाटन किया। विधानाचार्य के सानिध्य में मण्डप शुद्धि, इन्द्र प्रतिष्ठा, आचार्य निमंत्रण, सकलीकरण क्रियाएं की गई। शाम को नरेश उषा गोधा के निवास से आरती सहित जुलूस निकाला गया जो विद्यासागर वाटिका पहुंच समोसरण में विराजमान श्रीजी की आरती की गई।