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शीश भले ही कट जाए, धड़ अड़चास घंटे लड़ते हैं…

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kavi sammelan

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सहाड़ा. चामुण्डा माता मंदिर परिसर में कवि सम्मेलन देर रात तक चला। कवि सम्मेलन की शुरुआत कवयित्री रश्मि किरण ने मां सरस्वती की वंदना से की। गीतकार प्रभु प्रभाकर ने हास्य गीत से माहौल बनाया।

कवि कानू पण्डित ने माता-पिता के कर्ज को मत भूलना से सम्मेलन को परवान चढ़ाया। हास्य पैरोडीकार संजीव सजल ने पाखण्ड पर व्यंग्य जेल में बैठो आशाराम सुनाई। रश्मि किरण ने मेरी पायल की झंकार, याद आए पिया तेरी सुना कर शृंगार रस बहाया। वीर रस के कवि हेमन्त चौबे ने पाकिस्तान को ललकारते हुए कविता सुनाई। राणा राजस्थानी ने हास्य कविता से सभी को गुदगुदाया वहीं सिद्धार्थ देवल ने हल्दी घाटी में कई लादेन मरे हैं, भीलो के भुजदण्डों से सुनाकर तथा संचालक कवि बद्री बसंत ने शीश भले ही कट जाए, धड़ अड़चास घंटे लड़ते हैं से जोश भर दिया।

कवि सम्मेलन में प्रधान कमलेश चौधरी, पूर्व मंत्री डॉ. रतन लाल जाट, पूर्व विघायक कैलाश त्रिवेदी, मुके श चंदेल, प्रहलाद सुथार, आयोजन समिति के अध्यक्ष एडवोकेट रामेश्वर जाट, दीपक चौधरी, सुरेश शर्मा, अक्षयराज सिंह झाला सहित कई लोग मौजूद रहे। नेपाल में ड्राप बॉल प्रतियोंगिता में स्वर्णिम प्रदर्शन की भागीदार सहाड़ा की बेटियों सीमा जाट, सूर्या जाट व रजिया सुल्तान व अच्छें अंक प्राप्त करने वाले बालक-बालिकाओं को सम्मान पत्र दिया गया।