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संवत्सरी पर मन में करें क्षमा धारण

आचार्य महाश्रमण ने कहा संवत्सरी सबसे बड़ा पर्व

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संवत्सरी पर मन में करें क्षमा धारण

संवत्सरी पर मन में करें क्षमा धारण

भीलवाड़ा।
आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में पर्युषण के दौरान शनिवार को संवत्सरी पर्व मनाया। आचार्य ने भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा एवं तेरापंथ के पूर्वाचार्यों पर आख्यान दिया।
आचार्य ने कहा कि वर्ष भर में एक दिन यह संवत्सरी आती जो अध्यात्म की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह पर्व धार्मिक आराधना, क्षमा, मैत्री से जुड़ा हुआ है। आज के दिन मन में कोई गांठ नहीं रहनी चाहिए। यह दिन मन की गांठे खोलने व वैर भाव धोने का है। प्रतिक्रमण कर चौरासी लाख जीव योनियों से भी संवत्सरी के दिन क्षमा मांगी जाती है। व्यक्ति को मन में क्षमा धारण कर द्वेष की कलुषता को धो देना चाहिए। आज अगर किसी के प्रति मन में वैर भाव रह जाता है तो हमारा सम्यक्त्व तक उससे जा सकता है। सबसे खमत खामणा कर वैर से मुक्त होकर मैत्री का भाव हमारे भीतर रहे यह इस पर्व का संदेश है।
आचार्य ने कहा कि जैनशासन के अनुयायियों में अहिंसा, संयम तप के संस्कार जीवन चर्या में रहने चाहिए। मन में प्राणी हिंसा से बचने की भावना हो। गृहस्थ है तो भी जितना हो सके हिंसा से बचाव रखे। नवकार मंत्र हर जैनी को कंठस्थ रहना चाहिए। मुनि महावीर कुमार, साध्वी विश्रुतविभा, संबुद्धयशा, मुनि उदित कुमार, मुनि मोहजीत कुमार, मुनीम प्रसन्न कुमार, मुनि रमेश कुमार, मुनि संबोध कुमार, साध्वी विद्युतप्रभा, साध्वी संवरयशा, साध्वी कुशलप्रभा, समणी प्रणवप्रज्ञा ने विचार व्यक्त किए। संचालन मुनि दिनेश कुमार ने किया।