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भीलवाड़ा में खादी के तिरंगे को लगा रेडीमेड झंडे का ग्रहण

तिरंगा रैली में भी खादी के झंडे का नहीं होता उपयोग

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तिरंगा रैली में भी खादी के झंडे का नहीं होता उपयोग

तिरंगा रैली में भी खादी के झंडे का नहीं होता उपयोग

bhilwara news : भीलवाड़ा में भले ही भौगोलिक आजादी लाठी-डंडों और बंदूक की नालों ने दिलाई हो लेकिन मानसिक आजादी तो गांधी के चरखे से ही निकली थी। इसी चरखे से तीन रंग भी निकले थे। ये वही तीन रंग हैं जिन्हें हम सम्मान से ओढ़ते हैं। सीने से लगाते हैं और माथे पर बांधते हैं। मतलब हमारा तिरंगा। लेकिन, आज गांधी के चरखे से निकले इस तिरंगे पर बाजार हावी हो गया है।

साल दर साल स्वतंत्रता व गणतंत्र दिवस पर हावी होते बाजार ने खादी उद्योग की कमर तोड़ दी है। गत कुछ साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो इसका असर तिरंगे झंडे पर भी पड़ा है। खादी के तिरंगों की मांग तेजी से घट रही है और रेडीमेट तिरंगे काफी बिक रहे हैं।

सेवा सदन स्थित खादी भंडार केंद्र के व्यवस्थापक व सेवा सदन के अध्यक्ष सूरज सोमानी का कहना है कि हर बार स्वतंत्रता दिवस पर कई झंडे बिकते थे लेकिन, इस बार 100 ही झंडे बिके हैं। जबकि इनकी मांग काफी रहती है। आज राजस्थान में तिरंगा रैली निकाली जा रही है, लेकिन इनमें एक भी खादी का झंडा नजर नहीं आता है। यह झंडे सामान्य कपड़े के बनाए गए झंडे हैं। जबकि खादी के झंडे आईएसआई मार्का के होते हैं।

महंगा होने से मांग कम

आम तौर पर खादी का तिरंगा सरकारी कार्यालयों व स्कूलों में फहराया जाता है। सेवा सदन खादी भंडार में कार्यरत कर्मचारियों का कहना है कि इस तिरंगे की आम बाजार से कीमत भी ज्यादा रहती है। इसके अलावा बाजार में आम कपड़े के तिरंगे सस्ते व कम टिकाऊ होने के कारण हर साल बदलने पड़ते हैं। यही कारण है कि इसकी डिमांड में कमी आई है।

मानकों पर होता है खरा

खादी का तिरंगा तय मानकों पर खरा होता है। ये झंडे मध्य भारत खादी संघ ग्वालियर से मंगवाए जाते है, या फिर दौसा से मंगाए जाते हैं। केंद्र के व्यवस्थापक की मानें तो खादी का तिरंगा 3:2 के मानक पर बनाया जाता है। आम तौर पर ये 3 गुना 2 फीट, 3 गुना 4.5, तथा 6 गुना 4 फीट में उपलब्ध रहते हैं। लेकिन मांग सबसे अधिक 3 गुना 2 फीट की रहती है। जबकि 6 गुना 4 फीट की साइज का झंड़ा मुख्य समारोह व जिला कलक्ट्रेट के लिए मंगवाया जाता है।

ग्वालियर में तैयार राष्ट्रीय ध्वज का आरोहण

ग्वालियर का मध्य भारत खादी संघ उत्तर भारत में भारतीय मानक ब्यूरो से प्रमाणित राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने वाला एकमात्र संगठन है। देश में कर्नाटक के हुबली और महाराष्ट्र के मुंबई में राष्ट्रीय ध्वज बनाए जाते हैं। संघ के अनुसार इन दिनों तेज गति से तिरंगे बनाने का कार्य चल रहा है। तिरंगों को बनाने में प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। इससे तिरंगे का रंग फीका नहीं पड़ता है। भोपाल के पास सीहोर से कपास लाकर सूत तैयार किया जाता है। गुणवत्ता की जांच के बाद कपड़े की रंगाई के लिए तीन रंगों की अलग अलग ड्राइंग तैयार की जाती है। ध्वज के साइज के हिसाब से उस पर अशोक चक्र बनाया जाता है।

तीन साइज के ध्वज होते हैं तैयार

खादी संघ मुख्य रूप से तीन साइज के ध्वज तैयार करता है। यह भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) के अनुसार होते हैं। ग्वालियर में बनने वाले राष्ट्रीय ध्वज कई राज्यों में भेजे जाते हैं।

ये है खादी के तिरंगों की कीमत

साइज दाम प्रति झंडा

  • 3 गुना 4.5 फीट 2592 रुपए
  • 3 गुना 4.5 फीट 1836 रुपए
  • 3 गुना 2 फीट 972 रुपए