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होली के रंग चंग के संग, चारों तरफ गूंजे फाग के गीत

जैसे जैसे होली का पर्व नजदीक आ रहा है वैसे वैसे ही चंग की थाप पर फाग के गीत गूंज रहे।

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जैसे जैसे होली का पर्व नजदीक आ रहा है वैसे वैसे ही चंग की थाप पर फाग के गीत गूंज रहे। शहर में जगह-जगह फाग के गीतों का आयोजन हो रहा है।

भीलवाड़ा।
जैसे जैसे होली का पर्व नजदीक आ रहा है वैसे वैसे ही चंग की थाप पर फाग के गीत गूंज रहे। शहर में जगह-जगह फाग के गीतों का आयोजन हो रहा है। कही महिला मंडल भगवान संग फूलों की होली खेल रही है तो कहीं फाग की मस्ती जैसे रंगारंग व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। शहर में रविवार को कई जगहों पर फाग के कार्यक्रम हुए।

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मारवाड़ी मस्त मंडल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बीकानेर से आए कलाकारों ने एक से बढकर एक फाग की प्रस्तुति पर उपस्थित लोगों को फाग की मस्ती लेने पर मजबूर कर दिया। फाग के गीतों के साथ कलाकारों ने भंवई, तेराताल, मयूर नृत्य से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।

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फू लों की होली में भक्ति का बरसा रंग

भीलवाड़ा. 'ऐसी होली खेली कान्हा,भांग चढग़ी, कन्हैया मान जा रे आंख्या में गुलाल पडग़ी, केसर रंग से भरी पिचकारी लाई, मैं तो सांवरे के संग होली खेलन आई, ये मस्त महिना फ गुन का, श्रृंगार बना हर आंगन का' आदि भजनों से गूंजता मंदिर परिसर,भजनो के साथ नाचती महिलाए, पुष्पवर्षा के बीच गुलाल से होली खेलते श्रद्धालु, मौका था रविवार को नोगांवा सांवलिया सेठ मंदिर में फागोत्सव का।

चारभुजा महिला मण्डल गाडरमाला की सदस्याओं द्वारा प्रस्तुत भजनों पर महिलाएं झूम उठी। गुलाल के साथ होली खेलने के साथ ही महिलाओं ने भगवान सांवलिया सेठ को भी फू लों से होली खिलाई। इससे पूर्व सवेरे मारवाड़ी भजनों व चंग की थाप पर नृत्य की प्रस्तुति भी हुई। पुष्पा गग्गड़, प्रमिला सोडाणी, उर्मिला सोनी, कला न्याति, मंजू काबरा, पार्वती काबरा, रेखा अजमेरा,राधा न्याति आदि की भजनों की प्रस्तुति से माहौल भक्तिमय रहा। मंदिर प्रबंध समिति के गोविंद प्रसाद सोडाणी ने बताया फागोत्सव को लेकर भगवान सांवलिया सेठ का भव्य श्रृंगार किया गया।

होली के हुडदंग की बौछार से काव्य सम्मेलन ठहाकों से गूंजा

विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ की 'विक्रमशिला काव्य मंच' की ओर से भदादा बाग स्थित ओशो सुरधाम ध्यान केंद्र में काव्यगोष्ठी हुई। संस्था जिलाध्यक्ष डॉ एसके लोहानी खालिस की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी का नन्ही कवयित्री यशस्वी सुराणा ने सरस्वती वंदना से शुभारंभ किया।


ओशो सुरधाम की कविता लोहानी ने बताया कि डॉ. राजमती सुराणा ने 'कभी ग़म कभी खुशी के तराने लिखती हूं' नरेन्द्र वर्मा ने 'मां ने मुझे जो लिखाया वोही बोल रहा हूं, शब्दों के कुछ मटर तोड़ लिए अपने हाथों से छोल रहा हूं', गुलाब मीरचंदानी ने 'चुनावी साल-घोषणाओं का जाल कोरा धमाल' एवं गजल 'प्यार से बड़ी इस जहां में और कोई नेमत नहीं है, 'कुछ घडिय़ां तुम संग बिताऊं पर मुझे फु र्सत नहीं है' और नरेंद्र दाधीच ने 'प्रकट जब वेदना का अंश हो आंसू बरसता है स्वयं का लहू देता दंश हो आंसू बरसता है' एवं गजल ' कुछ स्वप्न पूर्णता पाते-पाते रात ठहर जाती है, कुछ लोग समझ में आते-आते जि़ंदगी गुजर जाती है' सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई प्रदान की।

डॉ एसके लोहानी खालिस ने 'कैसे रिझाऊं तुझे कैसे मनाऊं' पढ़कर सबको भावविभोर कर दिया। ओम उज्जवल ने होली की दस्तक पर 'भर पिचकारी रंग दो गुलाल, हम राधाकृष्ण राधाकृष्ण गाएंगे' तथा प्रहलाद सोनी सागर ने 'मैं लिखूंगा गीत किस पर अब गज़़ल क्या गाऊंगा' व छंद सुनाकर गोष्ठी को गरिमा प्रदान की। मुख्य अतिथि डॉ अशोक सोडाणी ने आभार जताया