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राजस्थान में यहां राजा जनमेजय ने पिता की मौत के प्रतिशोध करवाया था नाग यज्ञ

king janmejay Provided was nag yagya नागालो तालाब जिसके किनारे नाग यज्ञ किया गया था।

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king janmejay Provided was nag yagya in bhilwara

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जहाजपुर।
नाग पंचमी के अवसर पर सरसिया में सोमवार को मेले का आयोजन किया गया। सरसिया के ग्रामीणों द्वारा नाग देवता की शोभायात्रा निकाली गई। महिलाओं द्वारा नाग देवता को दूध अर्पण कर विशेष पूजा-अर्चना की गई। ग्रामीणों द्वारा इस मौके पर सामूहिक भोज का आयोजन किया गया।

नागालो तालाब जिसके king janmejay Provided was nag yagya किनारे नाग यज्ञ किया गया था। यहां आज भी 4 फीट की नाग प्रतिमा बनी हुई है। इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि राजा परीक्षित ने एक ध्यानस्थ ऋषि के गले में मरा हुआ सर्प डाल दिया। ऋषि के पुत्र श्रृंग को जब यह बात पता चली तो उसने राजा को श्राप दिया कि हे राजा यही सर्प तुम्हें 7 दिन बाद डसेगा। जिससे तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी और ऐसा ही हुआ।


राजा परीक्षित की मृत्यु के बाद उसके पुत्र जनमेजय king janmejay ने पिता की मृत्यु के प्रतिशोध स्वरूप नाग यज्ञ करवाया। इसमें सभी प्रकार के नागों का हवन किया गया। यह नाग यज्ञ जहाजपुर के निकट किया गया है; इसका नाम यज्ञ पुर रहा बाद में अपभ्रंश होते हुए यजयपुर,जजयपुर और फिर जहाजपुर हो गया। जहाजपुर से दक्षिण-पूर्व में करीब डेढ़ मील के अंतराल पर नागोला तालाब है। जहां जन्मेजय के नाग यज्ञking janmejay Provided was nag yagya का होना माना जाता है। आज भी इस स्थान पर नाग देवता की मूर्ति लगी हुई है। नागोला तालाब से एक छोटी नदी निकलती है जिसका नाम नागदही है। जहाजपुर कस्बा इसी नदी के किनारे बसा हुआ है।