भीलवाड़ा में खिसक गई नेताओं की जमीन, अब नई जगह के लिए कोरोना का सहारा

patrika.com/rajsthan news

By: jasraj ojha

Updated: 22 Jun 2020, 07:18 PM IST


भीलवाड़ा. नगर परिषद सभापति का कार्यकाल अगस्त २०२० में पूरा होने वाला है। निकाय चुनाव की तैयारियों में स्वायत्त शासन विभाग ने परिसीमन का काम पूरा कर लिया है। सबसे बड़ी बात है कि अब नगर परिषद में ५५ की जगह ७० वार्ड हो गए हैं। एेसे में १५ पार्षद ज्यादा निर्वाचित होंगे। परिसीमन के दौरान कई वार्ड छोटे हो गए तो कई वार्ड का क्षेत्र ही बदल गया। एेसे कई पार्षद है जो बरसों से एक ही क्षेत्र से चुनाव लड़ते आ रहे हैं। अब उनका क्षेत्र बदल गया है। एेसे में उनको अब नई जमीन तलाशनी होगी। कारण है पहले जहां से चुनाव लड़ते थे वहां नया वार्ड बन गया है। अब मतदाता भी बदल गए हैं एेसे में उनको नए सिरे से पहचान बनानी होगी। इसके लिए इन लोगों ने वार्डों में दौरे शुरू कर दिए हैं।

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विवादों में रहा इस बोर्ड का कार्यकाल
नगर परिषद बोर्ड का यह कार्यकाल काफी चर्चित व विवादों भरा रहा। पहले भाजपा के टिकट पर ललिता समदानी सभापति बनी। बाद में भाजपा विधायक वि_लशंकर अवस्थी, सांसद सुभाष बहेडि़या से अनबन के बाद पार्टी से निष्कासित कर दीपिकाकंवर को सभापति बना दिया। बाद में समदानी न्यायालय स्थगन से वापस सीट पर आ गई। इसके बाद सभापति कांग्रेस में आ गई। इस पर भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव पास कर दिया। इसके बाद कांग्रेस सरकार ने मंजू पोखरना को सभापति बनाया। इसके नौ दिन बाद ही चुनाव हुए जिसमें भाजपा की मंजू चेचाणी को सभापति चुना गया। अब अगस्त में कार्यकाल पूरा हो रहा है।
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हंगामा, प्रदर्शन में बीता समय
कभी सभापति व आयुक्त में नहीं बनी तो कभी पार्षदों व सभापति में। एेसे में जनता के काम नहीं हुए। कभी निविदा में भाईबंदी का खुलासा हुआ तो कभी सरकार ने ही निविदाएं निरस्त कर दी। भीलवाड़ा नगर परिषद को प्रदेश में सबसे सक्षम निकायों में गिना जाता है लेकिन विवादों के चलते काम नहीं हुए। गत दिनों नगर परिषद के पार्षद व ठेकेदार एक जगह गठबंधन करते पकड़े गए। इसके बाद आयुक्त ने निविदाएं ही निरस्त कर दी थी।
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करते रहे वादें नहीं हुए काम
आजाद चौक में बेसमेंट पार्र्किंग, चित्रकू  टधाम में बेसमेंट पार्र्किंग, हरणी महादेव रोपवे सहित कई सपने दिखाए थे। आयुक्त ने इनमें से दो प्रोजेक्ट को तो अनफिट बना दिया। इनकी डीपीआर बनाने पर लाखों रुपए खर्च कर दिए लेकिन कोई काम नहीं हुआ। इसी तरह शहर में भी कोई विकास का बड़ा काम नहीं हुआ।
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नोटिस देते रहे और होते रहे निर्माण
नगर परिषद के इस कार्यकाल में एक काम खूब हुआ वह है अवैध निर्माण। नगर परिषद के अधिकारी नोटिस देते रहे और काम होता रहा। सिंधुनगर में पूरा आवासीय क्षेत्र व्यवसायिक बन गया। मकानों में कॉम्पलेक्स बन गए। स्थिति यह है कि मार्केट में इतना अतिक्रमण बढ़ गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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