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तर्पण ही नहीं, रोजी-रोटी के इंतजाम भी करती है त्रिवेणी में डुबकी, निकालते गहने और सिक्के

संगम में दिवंगतों की अस्थियां बहाने आते हैं लोग, अस्थियों में सोने-चांदी की चीजें खोजते हैं जरूरतमंद

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looking for bread in the river in bhilwara

looking for bread in the river in bhilwara

भीलवाड़ा।

देश में तीन नदियों के संगम त्रिवेणी को लोग पवित्र मानते हैं। यहां सालों पूर्व से लोग दिवंगतों की अस्थियों को तर्पण करते आए हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से मृत आत्माओं को मोक्ष मिलता है। मेवाड़ की गंगा यानी बनास, बेड़च व मेनाली के संगम को पवित्र स्थलों में गिना जाता है। इस त्रिवेणी संगम को लोग छोटा हरिद्वार भी कहते हैं, जहां लोग मृतकों की आत्मा की शांति के लिए दिवंगतों की अस्थ्यिां बहाते हैं।

यह तर्पण का तरीका है, वहीं इन अस्थ्यिों में कुछ लोग अपनी रोजी-रोटी तलाशते हैं। इससे इनका परिवार पलता है। ये अस्थ्यिों के साथ सोने-चांदी की कीमती वस्तुओं की आस में डुबकी लगाते हैं। इसमें मिली कीमती धातु की चीजों को बेचकर गुजर बसर करते हैं। विभिन्न पर्व व मेले में देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। त्रिवेणी संगम में प्रवाहित अस्थियों को किनारे से हटाने व उनको पानी में गलाने के लिए यहां स्थित शिव मंदिर के ट्रस्ट प्रबंधन के कर्मचारी काम करते हैं। बाहर से आए लोग सर्दी, गर्मी व बारिश बारह माह इन लोगों का यहां से मिलने वाले वस्तुओं को बेचकर अपना व परिवार का गुजारा चलाते हैं।


रोजाना छलनी लेकर उतरते
संगम पर विसर्जित अस्थियों व राख में सोने व चांदी के जेवरात, सिक्के या दिवंगतों की प्रिय वस्तु रखी जाती है। जिसे लोग दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए नदी में प्रवाहित करते हैं। बाहर से आए लोग नदी के पानी में परात, लोहे की छलनी व कपड़े का जाल लेकर उतर जाते हैं। यहां प्रवाहित अस्थियों को छानते हैं। रोजाना पांच से छह घंटे इसी काम में लगे रहते हैं। अस्थियों में चांदी की अगूंठी, सोने के गहने, सिक्के, पायेजब, आदि मिल जाते हैं।


परिवार का पेट पालते
मंदिर में शिवङ्क्षलग करीब 1600 साल पुराना है। यह जमीन से निकला है। जिले सहित आस-पास के जिले के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। त्रिवेणी संगम पर मृत लोगों की अस्थियां प्रवाहित करने की व्यवस्था है। मध्यप्रदेश के मंदसोर से आए कुछ लोग पानी में विसर्जित अस्थियों व राख से जेवरात व सिक्के तलाशते हैं। इससे ये लोग अपना व परिवार का गुजारा करते हैं। पानी में कई बार इन्हें कीमती चीजें भी मिल जाती है। फूल नहीं होने पर श्रद्धालु चांदी व सोने के फूल व सिक्के विसर्जित करते हैं।
-शंभू पुरी, पुजारी, त्रिवेणी संगम, मंदिर