रोजाना छलनी लेकर उतरते
संगम पर विसर्जित अस्थियों व राख में सोने व चांदी के जेवरात, सिक्के या दिवंगतों की प्रिय वस्तु रखी जाती है। जिसे लोग दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए नदी में प्रवाहित करते हैं। बाहर से आए लोग नदी के पानी में परात, लोहे की छलनी व कपड़े का जाल लेकर उतर जाते हैं। यहां प्रवाहित अस्थियों को छानते हैं। रोजाना पांच से छह घंटे इसी काम में लगे रहते हैं। अस्थियों में चांदी की अगूंठी, सोने के गहने, सिक्के, पायेजब, आदि मिल जाते हैं।