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लाखों की मशीन खा रही धूल

राजस्थान में कृ षि जिंस की साफ-सफाई एवं फिनि शिंग के लिए लाखों की लागत से खरीदी गई अधिकांश मोबाइल क्लिनिंग सोटिंग मशीनें कृषि मंडियों में धूल फांक रही है। laakhon kee masheen kha rahee dhool

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लाखों की मशीन खा रही धूल

लाखों की मशीन खा रही धूल

भीलवाड़ा कृ षि उपज समिति मंड़ी, विशिष्ट श्रेणी में भी मशीन के यही हाल है। यहां मंडी प्रशासन ने कबाड़ से निकाल कर मशीन को किराए पर चलाने की को शिश भी की, लेकिन यह प्रयास भी फि लहाल असरकार साबित नहीं हुए है। Mobile Cleaning Sooting Machine

राज्य में सरकार ने किसानों को मंडी यार्ड में सुविधाएं प्रदान करने के लिए वर्ष 2020 में करोड़ों की लागत से मोबाइल क्लिनिंग सोटिंग मशीनें खरीदी। प्रत्येक मशीन की लागत बीस लाख रुपए आई। राज्य की 111 कृ षि मंडियों को यह मशीनें आवंटित की गई। इसके तहत भीलवाड़ा कृ षि उपज मंडी को भी 19 फरवरी 2021 को एक मशीन आवंटित हुई, लेकिन मशीन के उपयोग के प्रति किसानों से लेकर मंडी प्रशासन तक ने उत्साह नहीं दिखाया। मौजूद हालात यह है कि मंडी के मुख्य गेट पर महज शो पीस बन कर ही रह गई।

प्रदेश भर में आवंटित मशीनों की उपयोगिता को लेकर कई मंडी के व्यापार संघों व संगठनों ने सवाल उठाया तो सरकार ने किराए पर संचालन की राह निकाल ली। इसी योजना के तहत भीलवाड़ा मंडी प्रशासन ने भीलवाड़ा कृ षि उपज खाद्यान संघ के जरिए भीलवाड़ा की फर्म डागा ब्रदर्स को प्रति माह साढ़े सात हजार की दर से तीन माह के लिए 11 अक्टूबर 2022 को किराए पर मशीन दी। लेकिन संबं धित फर्म को उपयोग के अभाव में मशीन का किराया ही भारी पड़ गया। फर्म ने 11 अप्रेल 2023 को यह भारी भरकम मशीन फिर मय किराए के लौटा दी। इसके बाद से मशीन पर फिर कबाड़ की गर्द छाई हुई है।


जिले के वि भिन्न हिस्सों से कृ षि उपज लेकर आने वाले किसानों के लिए यह मशीन आवं टित हुई है। मंडी यार्ड में ही किसान अपनी उपज को इस मशीन के जरिए साफ करवा कर इसकी गुणवत्ता को और बढ़ा सकता है। मशीन का इले क्टि्रक के साथ ही डीजल से भी संचालन संभव है। लेकिन किसान सफाई के दौरान उपज घटने, समय अ धिक लगने, तकनीकी समस्याएं आने की आशंका के प्रभाव से मशीन का उपयोग करने से कतरा रहा है।


भीलवाड़ा मंडी सचिव महिपाल सिंह बताते है कि किसानों के लिए यह मशीन उपयोगी है, लेकिन किसान इसका उपयोग जानकारी के अभाव के साथ ही वि भिन्न कारणों से करने से कतरा रहे हैं। मंडी प्रशासन ने किराए के जरिए भी मशीन को संचालित करने की को शिश की है। मंडी प्रशासन का प्रयास है कि मशीन का उपयोग हो, इसके लिए अब जागरूकता अ भियान शुरू करेंगे।

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